जफराबाद। श्रीमद्भागवत महापुराण का एक-एक शब्द महामंत्र है। यह मनुष्य को जीवन जीने की राह दिखाता है। ये बातें वीरभानपुर गांव में बृहस्पतिवार को आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में काशी से आये पंडित जय किशोर शास्त्री ने कहीं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत सुनने से ही मनुष्य को पापों से मुक्ति मिल जाती है। उन्होंने शुकदेव महाराज के जन्म की कथा सुनाई। कहा कि भगवान शंकर ने माता पार्वती को श्रीमद्भागवत की कथा सुनाते हुए यह शर्त रही कि वे कथा सुनते समय सोएंगी नहीं। बाद में माता पार्वती कथा सुनते समय सो गईं। उस समय शंकर जी के पीछे पेड़ पर एक अंडा था, जो हवा के झोके से गिर गया। उसमें कथा के प्रभाव से जान आ गई और वह शंकर जी के कथा सुनाने के दौरान हुंकारी भरता रहा। जब कथा समाप्त हुई, तब माता पार्वती नींद से उठ कर बोलीं कि प्रभु मैं सो गई थी। यह सुनते ही शिव जी ने कहा कि तब हुंकारी कौन भर रहा था। पीछे देखा तो पता चला कि अंडे के जीव ने कथा के दौरान हुंकारी भरी थे। इस पर भगवान शंकर ने उसे मारने के लिए दौड़ाया तो वह वह जाकर वेदव्यास की पत्नी के मुख में घुस कर पेट में चला गया। 12 वर्ष तक उसने जन्म नहीं लिया। फिर वेदव्यास के समझाने पर उसने जन्म लिया। बाद में वेदव्यास ने उसे श्रीमद्भागवत के 18 हजार श्लोक सुनाए। इस मौके पर रमेश चंद्र मिश्र, शशिकांत पाठक, संतोष मिश्र, जितेंद्र मिश्र, मनमोहन मिश्र, विजय मिश्र, लाल साहब पाठक और रविंद्र उपाध्याय आदि मौजूद थे।