वाराणसी-लखनऊ नेशनल हाईवे पर टीडी कालेज गेट के सामने टूटी सड़क से गुजरते वाहन।
सड़क हादसों में हर दिन किसी न किसी को जान गंवानी पड़ रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो 15 मई से 16 जून के बीच 38 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है। जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हादसों का मुख्य कारण अनियंत्रित गति और जर्जर सड़कें, सड़कों पर खड़े वाहन बन रहे हैं।
अकेले सड़कों पर खड़े वाहनों के चलते आधा दर्जन से अधिक मौतें हुई हैं।जिले में तकरीबन तीन लाख वाहन पंजीकृत हैं। जबकि हर रोज बाहरी जिलों के तीन से चार हजार वाहन गुजरते हैं। जर्जर सड़कों और सड़कों पर बेतरतीब खड़े वाहनों के चलते हादसे हो रहे हैं।
इसके अलावा नशे में गाड़ी चलाना और भोर में गाड़ी चलाने के दौरान नींद आना भी एक कारण बन रहा है। हादसों को रोकने के लिए कोई इंतजाम परिवहन विभाग की ओर से नहीं हुआ है। आंकड़ों पर गौर करें तो सिकरारा क्षेत्र में पांच, गौराबादशाहपुर में दो, जलालपुर में पांच, लाइन बाजार थाना क्षेत्र में 5, बदलापुर में तीन, बक्शा में
एक, रामपुर में दो , खुटहन में दो , मुंगरा बादशाहपुर में पाच, मछलीशहर में एक, मड़ियाहूं में एक, शाहगंज और मीरगंज में एक एक, सरपतहा मे दो, डोभी और केराकत में एक एक मौत हुई है।