बेसिक शिक्षा परिषद के जिला समन्वयक कृपाशंकर पांडेय ने बक्शा विकास खंड के कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बच्चों के शिक्षा के स्तर से लेकर अध्यापक और छात्रों की उपस्थिति व एमडीएम में तमाम खामियां पाई गई। आठवीं कक्षा के किसी भी छात्र को राष्ट्रपति का नाम पता नहीं है तो 1/2 और 1/4 में छोटी और बड़ी संख्या कौन है इसकी भी जानकारी उन्हें नहीं है।
उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंप दी है।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय चुरावनपुर कुल 120 बच्चों का नामांक हुआ है। जांच के समय 55 बच्चे उपस्थित थे। कक्षा आठवीं का कोई भा छात्र राष्ट्रपति का नाम नहीं बता सका। कक्ष में चाक भी नहीं थी। श्यामपटट्ट पर कुछ नहीं लिखा गया था। पूरी कक्षा में सिर्फ एक छात्रा कंचन चौहान ने 1/2, 1/3 और 1/4 में सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्या बता सकी। प्रधानाध्यापक गीता सिंह द्वारा समय सारिणी का निर्धारण नहीं किया गया था। विद्यालय में पांच शिक्षक एवं तीन अनुदेशकों की तैनाती है।
बावजूद इसके कोई शिक्षा का स्तर काभी चिंताजनक पाया गया। प्राथमिक विद्यालय चुरावनपुर में 12:35 बजे तक छात्रों की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई थी। 164 बच्चों का नामांकन है लेकिन 51 बच्चे मौजूद थे। जबकि इसके पहले की तारीख में 90 और 70 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई है। एमडीएम में सब्जी बनी थी लेकिन गुणवत्ता बेहद घटिया थी।
उच्च प्राथमिक विद्यालय उटरुकला में दोपहर 1:30 बजे तक छात्रों की उपस्थिति दर्ज नहीं थी। एक दिन पहले की तारीख में भी छात्रों की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई थी। आठवीं के छात्रों ने बताया कि विज्ञान विषय 11 पाठ तक पढ़ाया गया है लेकिन कोई भी छात्र यह नहीं बता सका कि इंसान श्वास के रूप में कौन सी गैस लेता है और कौन सी गैस बाहर छोड़ता है।
कक्षा छह में सहायक अध्यापिका बीनू सिंह और शिक्षा प्रेरक आपस में बातें कर रहे थे। और बच्चे शोर मचा रहे थे। प्राथमिक विद्यालय गढ़ा बाघराय द्वितीय में सहायक अध्यापक राजेश कुमार अकेले पढ़ा रहे थे। यहां प्रधानाध्यापक कैलाशनाथ यादव आकस्मिक अवकाश पर थे जबकि सहायक अध्यापिका रीता साहू दो फरवरी से अनुपस्थित चल रही हैं। उनके नाम के आगे किसी भी दिन अनुपस्थिति दर्ज नहीं की गई थी। ऐसा प्रतीत हुआ कि प्रधानाध्यापक की सांठगांठ से उनकी उपस्थिति एक साथ दर्ज की जाती है।