फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नासिक से बाइक पर आए युवक, प्रयागराज में सीज हो गया इंजन......

विज्ञापन
12- नासिक से बाईक द्वारा घर जा रहे युवकों को मीरगंज में पकड़कर भेजा गया क्वारंटाईन सेंटर। - फोटो : JAUNPUR
विज्ञापन
मीरगज। लॉक डाउन के चलते शहरों में फंसे लोग जैसे-तैसे घर आने के लिए निकल पड़े हैं। नासिक में रह रहे जौनपुर के दो युवक बाइक से ही घर के लिए निकल पड़े। वह प्रयागराज के हंडिया तक तो पहुंचे, मगर इसके बाद बाइक का इंजन सीज हो गया। आगे बाइक लेकर पैदल आ रहे दोनों युवकों को पुलिस ने जंघई के पास रोक दिया। पूछताछ के बाद उन्हें मुंगराबादशाहपुर के एक स्कूल में क्वारंटीन किया गया है।
विज्ञापन

मीरगंज थाना क्षेत्र के बभनियांव गांव निवासी रोहित विश्वकर्मा 20 अपने साथी बरसठी थाना क्षेत्र के रामपुर गांव निवासी पवन विश्वकर्मा 21 के साथ नासकि में राजमिस्त्री का काम करता है। लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया। पास में जो पैसे थे, वह भी खत्म होने लगे तो दोनों ने घर निकलने का फैसला कर लिया। 24 अप्रैल की भोर में नासिक से बाइक पर सवार होकर घर के लिए निकल पड़े। 25 अप्रैल की रात 8 बजे वह हंडिया पहुंचे तो उनकी बाइक का इंजन सीज हो गया। रात भर हंडिया में रहे। इसके बाद 26 अप्रैल की दोपहर वहां से पैदल ही बाइक लेकर चल पड़े। देर शाम जंघई पहुंचे तो जंघई चौकी प्रभारी संतोष कुमार शुक्ला ने उन्हें रोक लिया। पूूछताछ के बाद इसकी जानकारी एसडीएम मछलीशहर अमिताभ यादव को दी। उन्होंने दोनों युवकों को मुंगराबादशाहपुर के एक स्कूल में क्वारंटीन के लिए भेजवा दिया। इन युवकों ने बताया कि वे जब 24 अप्रैल की भोर में नासिक से निकले और लगातार चलते रहे। रास्ते में दो जगह चाय पीने और नाश्ता करने के लिए रुके थे।
परिवार समेत भूखे-प्यासे, बिहार चला मजदूर
सिंगरामऊ। हाईवे निर्माण में लगा श्रमिक पिंटू अपने परिवार के साथ लखनऊ से पैदल की बिहार की ओर चल पड़ा है। सोमवार को वह प्रतापगढ़ की सीमा को पार जौनपुर आया। यहां बार्डर पर हरिहरपुर पेट्रोल पंप के पास सभी आराम के लिए रुके। थके-हारे श्रमिक और परिवार की हालत देखते व्यवसाई अवधेश कुमार ने उन्हें खाने के लिए राशन, सब्जी आदि सामग्री उपलब्ध कराया। पिंटू ने बताया कि बिहार से आकर लखनऊ में सड़क बनाने का काम करता है। लॉक डाउन होते ही काम बंद हो गया और परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया। जगदीशपुर में उसे परिवार सहित 14 दिन क्वारंटीन भी किया गया, वहां से छोड़ दिया गया। अब घर पहुंचने के लिए पैदल जा रहे हैं। लंबी दूरी है लेकिन कोई विकल्प भी नहीं है। घर से बाहर निकलकर काम करना इतना कष्टकारी साबित होगा मजदूरों ने सपने में भी नहीं सोचा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें