विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर-प्रदेश के बैनर तले शनिवार को हाइडिल स्थित कार्यालय पर समिति के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। जिला संयोजक निखिलेश सिंह ने कहा कि आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों की राय लिए बिना निजीकरण की कोई प्रक्रिया शुरू न की जाए। संघर्ष समिति ने सरकार से मांग की है कि अरबों-खरबों की बिजली की संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए एक कमेटी बनाई जाए, जिसमें कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के प्रतिनिधि भी हों।
अभियंता संघ के सचिव सौरभ मिश्रा ने कहा कि सरकार के निजीकरण की इस गलत नीतियों से कर्मचारियों की सेवा शर्तें, आम घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और गरीब उपभोक्ता प्रभावित होते हैं। आगरा और ग्रेटर नोएडा में किए गए विफल प्रयोगों की समीक्षा को जरूरी बताते हुए निजीकरण के नाम पर उपभोक्ताओं को ठगने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने निजी कंपनियों पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाया।
प्राविधिक के पूर्वांचल अध्यक्ष सत्या उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश की आम जनता और कर्मचारियों के हित में बिजली का निजीकरण पूरी तरह अस्वीकार्य है। लोकतांत्रिक ढंग से निजीकरण को समाप्त करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे।
इस मौके पर धीरेंद्र कुमार सिंह, अमित राय, राहुल कुमार, मिठाई लाल, कमलाकांत मिश्रा, हरि गोविंद आदि उपस्थित रहे।