किसान मधुमक्खी पालन कर आय बढ़ा सकते हैं। इसके लिए जिले में आठ इकाइयां स्थापित की जाएंगी। किसानों को इकाई लगाने के लिए खुद खर्च करना पड़ेगा। इसके बाद विभाग की ओर से 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसके लिए किसानों की ओर से ऑनलाइन आवेदन जरूरी है। किसानों का चयन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।
किसान परंपरागत रूप से धान और गेहूं की खेती करते आ रहे हैं। जबकि मधुमक्खी पालन के जरिये भी कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके तहत किसान को प्रति इकाई दो लाख 20 हजार रुपये व्यय करने हैं। इस पर उद्यान विभाग की ओर से 40 फीसदी अनुदान यानी 88 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
मधुमक्खी पालन का उचित समय फरवरी से मार्च तक का होता है। यानी वसंत ऋतु। जैसे ही मौसम गर्म होना शुरू होता है और फूल खिलने लगते हैं, किसान अपना छता स्थापित कर सकते हैं। इस समय फूलों की संख्या अधिक होती है। इससे मधुमक्खी की संख्या में बढ़ोतरी होती है।
मधुमक्खी पालन में एक बाक्स से 20 से 25 लीटर शहद प्राप्त होता है। यह बाजार में 150 रुपये तक प्रति लीटर बिकती है। इससे किसान को सालाना करीब दो लाख रुपये तक आय होती है। परंपरागत खेती से हट कर खेती करने से किसानों की आय बढ़ रही है। इसके लिए सरकार भी सहयोग दे रही है।