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मार्च की शुरुआत, तल्खी अप्रैल सी

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जौनपुर। मौसम का मिजाज लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। मार्च के पहले ही सप्ताह में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच गया है। आमतौर पर ऐसा मौसम मार्च के अंत और अप्रैल में होता है। मौसम विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिंग का असर बता रहे हैं। मौसम में तल्खी से फसलों पर भी दुष्प्रभाव की आशंका से किसान सहमे हुए हैं।
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फरवरी के तीसरे सप्ताह तक सर्दी का असर बना हुआ था। सुबह-शाम ठंड हवाएं ठिठुरन का अहसास करा रही थी। इसके चलते घर से निकलते वक्त लोग स्वेटर, जैकेट साथ रखना नहीं भूलते थे। इसके बाद से अचानक मौसम में हुए बदलाव ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। दिन की धूप अभी से असहनीय होने लगी है। मंगलवार को तापमान 31 डिग्री सेल्सियस रहा। कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक पंकज जायसवाल बताते हैं कि आमतौर पर ऐसा मौसम मार्च के अंत या अप्रैल में होता है। मार्च के प्रथम सप्ताह में तापमान 28 से 30 तक ही बना रहता है और नमी भी बनी रहती है। इस बार मौसम का अलग रुप दिख रहा है। इससे गर्मी अधिक पड़ने के आसार हैं। अगले पांच दिनों तक मौसम में बदलाव की संभावनाएं नहीं हैं। इस दौरान 8 से 10 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा चलती रहेगी। उतार-चढ़ाव भरे इस मौसम में सेहत के साथ फसलों के लिए भी सावधानी बरतने की जरुरत है।
अरहर में कीटों का खतरा, गेहूं में दानों पर पड़ेगा प्रभाव
जौनपुर। मौसम में बदलाव से किसानों की चिंता बढ़ी हुई। फसलों के लिए यह मौसम नुकसानदायक माना जा रहा है। पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार का कहना है कि इस समय अरहर की फसल में फूल आ रहे हैं। साथ में फलियां भी बन रही हैं। ऐसी अवस्था में अरहर को कीटों से बचाना आवश्यक है। इस समय ध्यान नहीं दिया गया तो उत्पादन में लगभग 30 फीसदी की कमी हो जाती है। अरहर ऐसी फसल है, जिसमें मड़ाई के समय सूखा दाना यानी तिरछी अधिक पाई जाती है। अरहर की फलियां जब मुलायम होती है उसी समय फली मक्खी का प्रकोप होता है। फली मक्खी की छोटी सूड़ियां फली के अंदर दानों को खाती रहती हैं, मगर बाहर से पता नहीं लगता। इससे बचाव के लिए क्लोरपीरिफॉस 2 मिली प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें। पुन: 10 से 15 दिन के अंतराल पर इंडाक्शाकार्ब कीटनाशक की 1 मिली मात्रा प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें। वहीं गेहूं की फसल में इस समय नमी का बना रहना आवश्यक है। इसके लिए हल्की सिंचाई करते रहें। अगर नमी कम हो जाएगी तो गेहूं का दाना सिकुड़ा हुआ एवं पतला हो जाएगा।
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