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मादक पदार्थों के सेवन से प्रभावित होता है परिवार और समाज

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सीएमओ कार्यालय में डॉ. राकेश कुमार की अध्यक्षता में इंटरनेशनल डे अगेंस्ट ड्रग एब्यूज एंड इलीसिएट ट्रैफिकिंग पर रविवार को गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें सभी को नशा नहीं करने का संकल्प दिलाया गया।
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सीएमओ डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि युवाओं में नशा की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। जिसे रोकने की जरूरत है। अभिभावकों के साथ समाज के हर व्यक्ति को जागरूक होने की जरूरत है। नशा उन्मूलन के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. राजीव कुमार ने लोगों को नशा करने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के निवारण के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसंबर 1987 को प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया था कि प्रत्येक वर्ष 26 जून को इस दिवस को मनाया जाएगा। नशे की दवाओं के दुरुपयोग, सिगरेट , शराब, अफीम, चरस, गांजा, भांग, स्मैक आदि के सेवन से शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान होता है। युवाओं को नशे की लत से दूर करने की जरूरत है। मादक पदार्थों का सेवन केवल एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं। जो जनसंख्या का 15 प्रतिशत है। दूसरे नंबर पर भांग है। तीन करोड़ लोग इसका नशा करते है। हेरोइन का 1.14 प्रतिशत लोग सेवन करते है। गोष्ठी में डीआईओ डॉ. एनके सिंह, जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आईएन तिवारी, एसीएमओ डॉ. सत्य नारायण हरिश्चचंद्र, डीईआईसी मैनेजर अमित गौड़, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) सत्यव्रत त्रिपाठी, नीरज सिंह आदि मौजूद रहे।
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