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मानसून से मिला सूखे का संकट,फसल बीमा की ओर बढ़ किसानों का रूझान

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जौनपुर। मानसून की शुरुआत में अच्छी बारिश होने की उम्मीद से किसान खरीफ की फसलों की तैयारी में जुट गए थे। अभी तक अच्छी बारिश नहीं होने से किसान ज्वार, बाजरा, उड़द, मक्का, आदि खरीफ की फसलों की बुआई नहीं कर सके हैं। वहीं, धान की नर्सरी भी रोपाई के लिए तैयार हैं लेकिन बारिश न होने से किसानों के अरमानों पर पानी फिर रहा है। ऐसी स्थिति में अब किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा की ओर रुझान बढ़ा है। अब तक एक हजार से अधिक किसानों ने फसल बीमा करा लिया है। 31 जुलाई तक फसल बीमा कराने की अंतिम तारीख तय की गई है। जबकि पिछले साल 764 किसानों ने ही बीमा कराया था।
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मानसून आने के बाद भी अच्छी बारिश न होने और सूखा जैसी स्थिति बन जाने से किसानों को भुखमरी की चिंता सताने लगी है। जो किसान केवल खेती पर निर्भर है, उनके सामने विकट स्थिति आ गई है। ऐसे में अब किसान फसल बीमा करवा रहे हैं। उनका मानना है कि अगर हमें प्रकृति की मार झेलनी पड़ी तो बीमा के रूप में कुछ सहायता मिल जाएगी। पानी के अभाव में धान की नर्सरी सूख रही है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खीचने लगी हैं। ऐसे में किसानों को फसल बीमा कराने की सलाह दी जा रही है। खरीफ सीजन में धान मक्का, उड़द तिल और अरहर की खेती करने वाले किसान फसल बीमा करा सकते हैं। बीमा कराने की प्रीमियम भी शासन एवं बीमा कंपनी की तरफ से निर्धारित कर दिया गया है। पिछले वर्ष खरीफ के सीजन में 11514 किसानों ने फसल बीमा कराया था। इसमें 764 किसानों को क्लेम के रूप में बीमा कंपनी ने 1595787 रुपये किसानों को दिया था। 5394.9187 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बीमा कराया गया था। इस साल सूखे की आशंका के मद्देनजर किसानों का फसल बीमा की ओर रुझान बढ़ा है। अब तक करीब एक हजार किसानों ने फसल बीमा करा लिए हैं।
फसल बीमा के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को जागरूक नहीं किया जा रहा है। यदि फसल बीमा हो रहा है तो निश्चित तौर पर दो-तीन दिन में फसल बीमा जरूर कराऊंगा। अभी तक खरीफ की फसल में मक्का, उड़द, तिल्ली, आदि फसलों की बुआई नहीं हो पाई है। धान की रोपाई पानी के अभाव में नहीं हो पा रहा है। - विजय शर्मा किसान पुरानी बाजार
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आषाढ़ का महीना बीत गया। सावन की शुरुआत हो गई फिर भी बारिश की जगह खेतों में धूल उड़ रही है। किसानों की कमर टूट गई है। किसान अब तक मक्का, ज्वार, बाजरा, बजरी, उड़द, अरहर की बुआई नहीं कर सका है। धान की रोपाई भी अधर में लटक गई है। ऐसे में अब प्रधानमंत्री फसल बीमा की ओर उम्मीद बढ़ी है। - राजेश पाल किसान खजुरन
सूखे की आशंका को देखते हुुए किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा 31 जुलाई से पहले करा लें। सूखे की वजह से गांव में 75 प्रतिशत बुआई न होने पर उनको मुआवजा मिलेगा। यदि सूखे से उत्पादन कम होगा तो भी बीमित किसानों को क्षतिपूर्ति सरकार की ओर से मुहैया कराई जाएगी ।- रमेशचंद यादव, अपर जिला कृषि अधिकारी
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