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Jaunpur News: श्रीराम केवट प्रसंग सुनकर श्रद्धालु हुए भावुक

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नगर के बजरंग घाट पर स्थित विन्ध्यवासिनी मंदिर में पंचकुंडीय शतचंडी महायज्ञ व आठवें दिन मंगलवार को चल रही श्रीराम कथा का समापन हुआ। कथावाचक राघवदास महाराज ने राम केवट संवाद प्रसंग का वर्णन किया। इसे सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। राघव दास महाराज ने बताया कि भगवान प्रेम के भूखे हैं।
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उन्होंने राम केवट संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान राम केवट के समीप आए। गंगा का किनारा भक्ति का घाट है और केवट भगवान का परम भक्त है, किंतु वह अपनी भक्ति का प्रदर्शन नहीं करना चाहता था। केवट ने हठ किया कि आप अपने चरण धुलवाने के लिए मुझे आदेश दे दीजिए, तो मैं आपको पार उतार दूंगा। केवट ने भगवान से धन-दौलत, पद ऐश्वर्य, कोठी-खजाना नहीं मांगा। उसने भगवान से उनके चरणों का प्रक्षालन मांगा। केवट की नाव से गंगा पार करके भगवान ने केवट को उतराई देने का विचार किया। सीता ने अर्धागिनी स्वरूप को सार्थक करते हुए भगवान के मन की बात समझकर अपनी कर-मुद्रिका उतारकर उन्हें दे दी। भगवान ने उसे केवट को देने का प्रयास किया, किंतु केवट ने उसे न लेते हुए भगवान के चरणों को पकड़ लिया, जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है, ऐसे भगवान के श्रीचरणों की सेवा से केवट धन्य हो गया। इस मौके पर आचार्य रविंद्र द्विेवेदी, पुजारी रविंद्र शुक्ल, योगीराज, अखिलेश मिश्र, सुभाषचंद्र दुबे आदि उपस्थित रहे।
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