कहने को तो महिला शौचालय है, लेकिन उसमें हमेशा ताला बंद रहता है। रोडवेज परिसर की आधी जमीन पर मुंगरा थाने का कब्जा है। जिसपर उनके द्वारा दुर्घटनाग्रस्त वाहन जबरन खड़ा कर दिया जा रहा है। बसें भी परिसर के अंदर न आकर चौराहे से सीधे निकल जाती है।
प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्री श्याम कुमार, बाबूलाल पटेल, ओमकार नाथ विश्वकर्मा, चंद्रशेखर शुक्ला ने डिपो में पानी की व्यवस्था नहीं होने से महंगे दामों बॉटल का पानी खरीदकर प्यास बुझाना पड़ता है। इसके अलावा रोडवेज बसें अंदर न आकर सीधे हाइवे से निकल जा रही है। किराया पूरा दिया जाता है लेकिन बुनियादी सुविधाएं हम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों से बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है।