मुंगराबादशाहपुर। करीब तीन साल पहले पति अनिल की मौत के बाद मंजू अपने बच्चों के भरोसे जिंदगी की गाड़ी जैसे-तैसे खींच रही थी। उसे उम्मीद थी कि बच्चे बड़े होकर उसका सहारा बनेंगे और उसे वह सारी खुशियां देंगे, जिससे वह अब तक महरूम रही। उसे क्या पता कि जिंदगी में ऐसी काली सुबह भी आएगी, जब उसे अपने बेटा-बेटी की लाश देखनी पड़ेगी।
सड़क हादसे में नेहा और रोहित की मौत के बाद मां मंजू बेसुध थी। उसका सब कुछ लुट चुका था। छाती पीट-पीटकर वह बार-बार एक ही रट लगाए थे कि हे भगवान कौन सा गुनाह किया था, जो ऐसी सजा दी। यह दिन देखने से पहले मुझे उठा क्यों नहीं लिया। मां के इन सवालों के आगे हर कोई मौन था। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि वह कैसे दिलासा दें। आंखों में आंसू लिए हर कोई बार-बार नियति के क्रूर खेल को कोस रहा था। तीन बच्चों की मां मंजू प्राथमिक विद्यालय नारायणडीह में रसोइयां का काम करती है।
इसके अलावा दूसरों के घरों में काम-काज कर परिवार का भरण पोषण करती है। मुंबई में वाहन चलाने वाले पति की तीन वर्ष पहले मौत के बाद बच्चे की उसका सब कुछ थे। बेटे को उसने सेंट मेरी कांवेंट स्कूल में दाखिला दिलाया था। बेटी भी हाईस्कूल की परीक्षा में इसी वर्ष शामिल हुई थी। उन्हें इन दोनों से काफी उम्मीदें थीं। बड़ा बेटा राहुल (18) परिवार की स्थिति को समझते हुए करीब एक सप्ताह पहले ही रोजगार के लिए मुंबई गया था। घर पर दोनों बच्चों के साथ रह रही मंजू ने सुबह ही नाश्ता बनाकर बच्चों को परोसा था।
उन्हें नाश्ता कराने के बाद सजा-संवारकर स्कूल भेजा था। घर से निकले कुछ ही देर हुए थे कि अचानक उनके मौत की खबर आई तो उसने सुध-बुध खो दिया। नंगे पांव भागते हुए घटनास्थल पहुंची। वहां ट्रक के नीचे टूटी साइकिल और नेहा व रोहित के शव को देख वह दहाड़े मारकर रो पड़ी। घटना की जानकारी होते ही विधायक सुषमा पटेल और पूर्व विधायक सीमा द्विवेदी भी मौके पर पहुंचीं। पीड़ित मां को ढांढ़स बंधाते हुए उसके आंसू पोंछे। भरोसा दिलाया कि वह शासन-प्रशासन से उसे हरसंभव मदद दिलाएंगे।
बालू मंडी बन गई है मौत की मंडी
जौनपुर-प्रयागराज मार्ग पर कोदहूं के पास रोज सुबह-शाम लगने वाली बालू और गिट्टी की मंडी मौत की मंडी बन गई है। जिम्मेदारों की अनदेखी से यहां लबे रोड खड़े होने वाले बालू और गिट्टी लदे वाहन अक्सर हादसों का कारण बन रहे हैं। मेन रोड पर मंडी होने से वाहनों की रफ्तार भी इतनी अधिक होती है कि अक्सर लोग उसकी चपेट में आ जाते हैं। शुक्रवार की सुबह सगे भाई-बहन की मौत के पीछे भी यही कारण रहा। लोगों की जुबां पर यही सवाल रखा कि आखिर अभी कितने मांओं की कोख सूनी करने के बाद जिम्मेदारों की नींद खुलेगी।
कोदहूं गांव में लगने वाली इस मंडी में प्रतिदिन सुबह शाम दो दर्जन से अधिक बालू व गिट्टी लदी ट्रक सड़क के किनारे किनारे जगह-जगह खड़े रहते हैं। इस मंडी की वजह से सड़क पर न केवल जाम की भयावह स्थिति पैदा होती है, बल्कि दुर्घटना का सबब भी बना रहता है।
मुंगराबादहशाहपुर में सड़क हादसे में मृत बच्चों की मां को ढांढ़स बंधाती महिलाएं।- फोटो : JAUNPUR
मुंगराबादशाहपुर में हादसे में मृत बच्चों की मां को ढांढ़स बंधाती विधायक सुषमा पटेल।- फोटो : JAUNPUR