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फोर लेन पर खतरनाक कट, संभल कर चलना भाई

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21- गांव के लिंक रोड से फोरलेन हाईवे पर जाता बाई सवार। - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। अगर आप वाराणसी-लखनऊ फोरलेन पर चल रहे हैं तो चिकनी सड़क देखकर तेज रफ्तार में चलने की कोशिश कतई न करें। जौनपुर जिले की सीमा में त्रिलोचन से लेकर सिंगरामऊ तक इस हाईवे पर मौत के कई द्वार खुले छोड़ दिए गए हैं। जिले की सीमा में करीब 73 किलोमीटर का सफर तय करने वाले इस फोरलेन सड़क पर कहीं भी सर्विस लेन नहीं बनाई गई और सड़क भारी वाहनों के लिए खोल दी गई है। गांव से होकर आने वाले लिंक मार्ग अभी सीधे फोरलेन से जुड़े हुए हैं। यहां आए दिन लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं। सड़क सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक स्थानों पर भी एनएचएआई की ओर से लोगों को सचेत करने के लिए कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है।
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बक्शा थाना क्षेत्र के गोरियापुर के पास नौपेड़वा लेदुका मार्ग पर चलने वाले वाहन सीधे हाईवे को पार करते हैं। यहां जमीन से करीब 5 फीट उंचाई से होकर गुजरे हाईवे पर जब कोई वाहन लिंक मार्ग से अचानक हाईवे पर पहुंचता हैं तो हादसे की संभावना प्रबल हो जाती है। यहां कई हादसे हो चुके हैं ज िसमें लोगों की जान तक चली गई है। जिले की सीमा में सिंगरामऊ से लेकर त्रिलोचन तक ऐसे ही करीब 90 से अधिक लिंक मार्ग हाईवे को सीधे पार कर रहे हैं। वहां कोई सुरक्षा के लिए एहतियाती कमद नहीं उठाए गए हैं। इन लिंक मार्गों पर हाईवे से पहले न तो कोई ब्रेकर बना है और न ही कोई बोर्ड लगा है।
विशेषज्ञ की राय
फोरलेन तो वाहनों के तेज रफ्तार में चलने के लिए ही हैं इसलिए कहीं तीब्र मोड़ नहीं होना चाहिए। वैसे तो फोरलेन से लिंक मार्ग को सीधे नहीं जोडना चाहिए। लिंक मार्ग को हाईवे के समानांतर सर्विस रोड से जोडना चाहिए। जहां लिंक मार्ग हाईवे से जुड़ रहा है वहां उस लिंक मार्ग पर हाईवे से 50 मीटर पहले स्पीड ब्रेकर बनाना चाहिए और वहां कृपया धीरे चलें का बोर्ड भी लगाना चाहिए। हाईवे पर भी ऐसा बोर्ड लगाना चाहिए और लिंक मार्ग से पहले सड़क पर सफेद पट्टी लगानी चाहिए जिससे हाईवे से गुजरने वाले वाहनों की स्पीड वहां कंट्रोल हो सके। -उमाशंकर सिंह, रिटायर्ड अभियंता, पीडब्ल्यूडी।
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प्रदर्शन के बाद भी नहीं बना अंडर पास
बक्शा। क्षेत्र के नौपेड़वा-बटाऊवीर लेदुका मार्ग गोरियापुर के पास हाईवे को सीधे पार करता है। 15 किलोमीटर लंबे इस लिंक मार्ग पर वाहनों के भारी दबाव को देखते हुए लोग हाईवे के पास अंडर पास बनाने की मांग कर रहे थे। कई बार धरना प्रदर्शन हुआ। आंदोलित ग्रामीणों ने यहां दो महीने तक काम रोक दिया था। ठेकेदार को अपनी मशीन वापस ले जानी पड़ी थी। ग्रामीणों को आश्वासन देने के बाद भी यहां रातो बिना अंडर पास बनाए फोरलेन का निर्माण कर दिया गया।
फोरलेन का निर्माण अभी अधूरा है। इसे पूरा करने में अभी छह महीने का वक्त लग सकता है। हाईवे से जुडने वाले सभी लिंक मार्ग सर्विस लेन से जोड़े जाएंगे। सीधे कोई लिंक मार्ग हाईवे को क्रास नहीं करेगा। वहां सुरक्षा के लिए बोर्ड भी लगाए जाएंगे। -एसबी सिंह, परियोजना निदेशक एनएचएआई वाराणसी।
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