24- जलालपुर में निमार्णाधीन फोरलेन हाईवे पर उड़ रही भंयकर धूल।
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जौनपुर। जिला मुख्यालय से बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचने की राह में खतरे ही खतरे है। ऐसे में जौनपुर से बाबतपुर 38 किलो मीटर की दूरी तय करने में लोगों को एक से डेढ़ घ़ंटे लग जाते है। एयरपोर्ट की राह में दो से तीन रेलवे क्रासिंग और रेत, सड़क किनारे फैली बजरी के ढेर व गड्ढे हैं। जिसकी वजह से एयरपोर्ट पहुंचना आसान नहीं है।
लखनऊ- वाराणसी मार्ग का निर्माण कार्य वर्ष 2016 से चल रहा है। इसे तीन साल के अंदर निर्माण कार्य पूरा होना था। लेकिन अभी वैसे ही कहीं सड़क तोड़ कर तो कहीं बजरी बिछाकर छोड़ दिया गया है। बीस से अधिक हादसे होने के बावजूद भी कार्यदाई संस्था सड़क निर्माण के प्रति सुस्ती बरत रहीं है। इस रूट पर जहां जगह- जगह गड्ढे है वहीं अंधा मोड़ होने की वजह से खतरों का भय लोगों को सता रहा है। सिरकोनी से लेकर फुलपुर तक सड़क पर रेत- बजरी के ढेर लगा दिए गए है। फोरलेन बनाने वाली निर्माण एजेंसी शिथिलता बरत रहीं है। ऐसे में तीन वर्ष से लोग धूल एवं गड्ढों में फंसकर परेशान हो रहे है। सड़क निर्माण कार्य में लगी गायत्री प्रोजेक्ट लिमिटेड के अधिकारियों की मानें तो अभी डेढ़ वर्ष निर्माण में और लगेंगे। ऐसे में लोगों को एयरपोर्ट पहुंचना आसान नहीं होगा।
गुजरते हैं चार जिलों के लोग
जौनपुर। बाबतपुर एयरपोर्ट पर लखनऊ की तुलना में जहाज अधिक होने के नाते जौनपुर एवं सीमावर्ती जिलों के लोगों का आना जाना लगा रहता है। वैसे भी मुंबई, सहित विदेशों में जौनपुर के तकरीबन तीन लाख परिवार रहता है। हर रोज 200 से 300 लोग जहाज से उतरते और पकड़ने आते - जाते है। ऐसे में लोगों को तीन- तीन क्रासिंग, जाम एवं सड़क पर गड्ढों की वजह से काफी परेशानी होती है।
क्रासिंग बनी मुसीबत
जौनपुर। शाहगंज की तरफ से आने वालों को पांच, सिकरारा की तरफ से आने वालों को तीन, बदलापुर की तरफ से आने वाले को दो, केराकत की तरफ से आने वालों को एक क्रासिंग से गुजरना पड़ता है। जिले में हर ओर क्रासिंग एवं सड़क पर गड्ढों की वजह से एयरपोर्ट की यात्रा सुगम नहीं हो पा रहीं है। दिल्ली, कोलकाता, मुंबई से लोग डेढ़ से दो घंटे में आ जाते और उन्हें एयरपोर्ट से घर पहुंचने में तीन से चार घंटे लग जाते हैं।