खुटहन थाना क्षेत्र के गैर इरादतन हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों के विरुद्ध दोष साबित होेने पर शुक्रवार को एडीजे प्रथम नसीर अहमद ने खुले न्यायालय में 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सभी आरोपियों पर दो-दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। विचारण के दौरान आरोपी रामअजोर की मौत हो गई थी, जिससे उसके विरुद्ध मुकदमा समाप्त कर दिया गया। क्रास केस में चार आरोपियों को एक -एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
अभियोजन कथानक के अनुसार-खुटहन थाना क्षेत्र के चकमतहेपुर निवासी जियालाल ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि विवाद को लेकर आरोपीगण मरहट निवासी रामआजोर तथा शोभनाथ और चकबरना निवासी फूलचंद तथा पंकज कुमार लाठी डंडा से लैस होकर अपशब्द कहते हुए उसे मारने लगे। बचाने के लिए उसका लड़का विनोद कुमार और नाबालिग पुत्री मोनू आई। आरोपियों ने उन्हें भी मार पीटकर घायल कर दिया। उपचार के दौरान मोनू की मौत हो गई।
पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता अतुल कुमार श्रीवास्तव व लालमणि मिश्र ने सात गवाह कोर्ट में पेश कराया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस और तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिसीलन के पश्चात तीनों आरोपियों शोभनाथ, फूलचंद व पंकज को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास और दो-दो हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा सुनाई।
साथ ही वादी रामआजोर द्वारा किए गए क्रास केस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें न्यायाधीश ने आरोपीगण जियालाल, विनोद कुमार, मनोज कुमार, कमलेश कुमार को एक-एक हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया।