जिले में झूला वनस्पति घी एवं रिफाइंड आयल का उत्पादन करने वाली थानागद्दी के नाऊपुर गांव की जेवीएल एग्रो हाल के वर्षों में हुई कई जांचों में लगातार फेल होती आई है। बात चाहे मानक के अनुसार उत्पादन की हो या फिर फैक्ट्री में प्रदूषण की कंपनी ने इस संबंध में हुए आदेशों को नहीं माना।
पिछले चार सालों में इस कंपनी के उत्पादों के दस नमूने जांच में फेल हो चुके हैं। कई बार इस पर जुर्माना लगा, बंदी के आदेश हुए, फैक्ट्री सील भी हुई पर कंपनी प्रबंधन ने सारी कार्रवाइयों को धता बताते हुए उत्पादन जारी रखा और विभागीय अधिकारी इस पर नकेल नहीं कस सके।
नाऊपुर गांव स्थित जेवीएल एग्रो में झूला ब्रांड के वनस्पति घी एवं रिफाइंड आयल का उत्पादन होता है। तीस जुलाई 2012 को तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी ओंकार नाथ यादव ने रिफाइंड, वनस्पति तेल सहित चार नमूने लिए थे। जांच में सभी चाराें नमूने फेल पाए गए।
मामले की सुनवाई एडीएम/ न्याय निर्गमन अधिकारी की कोर्ट में हुई। मई 2013 में पहले मामले में 4 लाख 45 हजार, दूसरे में 4.50 लाख, तीसरे में 4.60 लाख, चौथे में 4.55 लाख रुपये समेत कुल 18.10 लाख का जुर्माना लगा और व्यवसायिक कार्य बंद करने का आदेश हुआ।
कंपनी जुर्माना अदा करने की जगह हाईकोर्ट चली गई। जहां अभी यह मामला चल रहा है। इसके बाद 2013 में कंपनी उत्पादों के सात नमूने लिए गए जिसमें चार जेवीएल कंपनी से और तीन दूकानों से लिए गए थे। इसमें तीन नमूने फेल पाए गए। जिसमें नमूने दो कंपनी के थे।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी पीलीभीत ने वर्ष 2014 में एक नमूना लिया जो जांच में मानव जीवन के प्रयोग हेतु असुरक्षित पाया गया। इस पर 2015 में केंद्रीय लाइसेंस अधिकारी डा. मनीषा नारायण ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया। कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ तत्कालीन खाद्य सुरक्षा आयुक्त के यहां से अंतरिम आदेश प्राप्त कर लिया गया।
कंपनी मामले को हाईकोर्ट ले गई जहां उद्योग की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2015 को अंतरिम आदेश को अवैधानिक करार करते हुए निलंबन आदेश को प्रभावी कर दिया। उधर, डीएम के निर्देश पर तत्कालीन अभिहित अधिकारी ने 26 अक्टूबर 2015 को कार्रवाई करते हुए कंपनी के उत्पादों का विक्रय और भंडारण रोक लगा दी।
इसी तरह 2015 में कंपनी उत्पादों के चार नमूने लिए गए जिसमें तीन नमूने जांच में फेल पाए गए। वर्ष 2015 के फेल नमूने के मामले में मार्च 2016 में तत्कालीन एडीएम ने कंपनी पर मात्र 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वर्ष 2016 में दो नमूने वनस्पति घी और एक रिफाइंड के लिए गए हैं लेकिन मेरठ से अभी तक उनकी रिपोर्ट नहीं आई है।