श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन बम विस्फोट कांड के बांग्लादेश निवासी दो आरोपियों में एक मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी को शुक्रवार को एडीजे प्रथम बुधिराम यादव की अदालत ने दोषी करार दिया। सजा शनिवार को सुनाई जाएगी। दूसरे आरोपी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई के मामले में फैसले के लिए अदालत ने दो अगस्त की तिथि नियत की है।
सुनवाई के दौरान दीवानी न्यायालय परिसर में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी। 28 जुलाई, 2005 को जौनपुर-सुल्तानपुर रेल रूट पर हरिहरपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन की जनरल बोगी में विस्फोट हुआ था। इसमें 12 यात्रियों की मौत हो गई थी और 18 गंभीर रूप से घायल हुए थे।
मामले में रेलवे के गार्ड जाफर अली ने उसी दिन जीआरपी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दो जुड़वां भाइयों मुहीबूल मुस्तकीन और अनीसुल मुरसलीम को गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ में बताया कि हुजी आतंकी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई, मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी और दो अन्य ने श्रमजीवी एक्सप्रेस में विस्फोट किया था।
स्पेशल सेल ने पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर पहले बाबू भाई को गिरफ्तार किया और बाद में रोनी को गिरफ्तार किया गया। दोनों को गिरफ्तार कर जौनपुर जेल लाया गया था। वर्ष, 2006 से ही यह मामला अदालत में चल रहा था।
इसमें रोनी के मामले में 53 गवाह और बाबू भाई आदि के मामले में 42 गवाह पेश किए गए। न्यायाधीश एडीजे प्रथम ने दोनों पक्षों की बहस एवं तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिशीलन के पश्चात शुक्रवार को आरोपी मो. आलमगीर उर्फ रोनी को आईपीसी की धारा 302, 307, 148, व रेलवे अधिनियम की धारा 150, 151 व
विस्फोटक अधिनियम की धारा 3 में दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता विजय यादव व बलिराम यादव ने की, जबकि मोहम्मद आलम गीर उर्फ रोनी की पैरवी अधिवक्ता श्यामशंकर तिवारी ने की।