केराकत तहसील के थानागद्दी, नाऊपुर स्थित 1100 करोड़ की जेवीएल एग्रो इंड्रस्टीज लिमिटेड का लाइसेंस भले ही रद्द हो गया है लेकिन इस फैक्ट्री में उत्पादित अधोमानक वनस्पति, रिफाइंड और सरसों तेल का बड़ा स्टाक बाजार में बिक रहा है।
तीन अक्तूबर, 2016 को झूला वनस्पति लिमिटेड का खाद्य लाइसेंस निलंबित करते हुए उत्पादन रोकने का आदेश दिया गया था। बावजूद इसके फैक्ट्री में उत्पादन होता रहा और होलसेल स्टाकिस्ट के जरिए बाजार में फुटकर की दुकानों पर भी पहुंच गया।
जौनपुर जिला प्रशासन ने तीन नवंबर को कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में बाजार में जाने के लिए उत्पादित माल को सील कर दिया था पर इससे पहले फैक्ट्री में उत्पादित जो सामग्री बाजार में पहुंच गई थी, उसके लिए कुछ नहीं किया गया।
हालांकि लाइसेंस निरस्त होने के बाद अब फैक्ट्री का वाराणसी के तिलमापुर स्थित डिपो भी जांच के दायरे में आ गया है। जौनपुर स्थित फैक्ट्री में वनस्पति समेत अन्य खाद्य पदार्थ बनने के बाद इसी डिपो में रखे जाते हैं। यहां से प्रदेश और देश के विभिन्न इलाकों में इसकी सप्लाई की जाती है।
सूत्रों की मानें तो डिपो में स्टोर किए गए माल पर प्रतिबंध लगता है। दूसरी ओर कहा जा रहा है कि फैक्ट्री में बने अधोमानक माल की खपत अब तक हो चुकी है। अगर प्रशासन संजीदा होता तो इसके प्रयोग पर पाबंदी लगाई जा सकती थी। जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे।
फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता करीब 750-800 टन प्रतिदिन थी लेकिन रोजाना 500 टन रिफाइंड, वनस्पति और सरसों तेल का उत्पादन होता था। सूत्रों की मानें तो फैक्ट्री प्रबंधन ने एफएसएसएआई में शपथ पत्र देकर कंपनी के 1100 करोड़ के होने का जिक्र किया है।
फैक्ट्री में ताला लगने से तीन से चार सौ मजदूर बेकार हो गए हैं। झूला वनस्पति में कार्य करने वाले मजदूर झुनझुनवाला वनस्पति तथा झुनझुनवाला गैसेज प्राइवेट लिमिटेड दोनों के ही कर्मचारी हैं। एक में 181 और दूसरे में 119 संख्या बताई जा रही है। बाकी सभी श्रमिक एवं ठेकेदार संविदा और डेली वेजेज पर काम करने वाले हैं।