रजिस्ट्री कराई गई भूमि पर ढाई साल बाद भी कब्जा नहीं दिलाने के एक मामले में मानवाधिकार आयोग ने तहसीलदार न्यायिक, कानूनगो और दो लेखपालों के खिलाफ एससीएसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराने का आदेश डीएम और एसपी को दिया है।
डीएम और एसपी ने संबंधित राजस्व अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश सरपतहा पुलिस को दिया है। आरोप है कि सरपतहा थाना क्षेत्र के मयारी मिसिरपुर गांव निवासी राम किशोर पासवान ने गांव में ही 16 नवंबर 2013 को जमीन का बैनामा करवाया था।
उसने जब जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की तो मनबढ़ों ने रोक दिया। वर्ष 2013 से ही वह बैनामे की भूमि पर कब्जा पाने के लिए थाना दिवस से लेकर तहसील दिवस में कई बार प्रार्थना पत्र दिया। उच्च अधिकारियों से भी गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
थक हार कर उसने मानवाधिकार आयोग से गुहार लगाई। मानवाधिकार आयोग में उसने शिकायत किया कि तहसील के अधिकारी उसका मानसिक उत्पीड़न करते रहे। मानवाधिकार आयोग ने शाहगंज के न्यायिक तहसीलदार, दो लेखपाल और कानून गो के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए पहले 16 अक्तूबर 2015 को ही आदेश जारी किया था।
फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आयोग ने सात जुलाई 2016 को रिमाइंडर जारी करते हुए डीएम एसपी को निर्देश दिया कि वे लापरवाह राजस्व अधिकारियों के खिलाफ दलित उत्पीड़न का केस दर्ज कराएं।
रिमाइंडर जारी होने के बाद जिलाधिकारी ने 25 जुलाई को एसपी को और उसी दिन एसपी ने सरपतहा थानाध्यक्ष को आदेश जारी करते हुए संबंधित के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में थानाध्यक्ष सरपतहा का कहना है कि क्षेत्राधिकारी अभी छुट्टी पर हैं। जैसे ही वह आएंगे संबंधित के खिलाफ केस दर्ज कर ली जाएगी।