जलालपुर। रेहटी गांव में गुरुवार को बाउंड्रीवाल के मलबे में दबने जिन तीन बच्चों की मौत हुई है उससे दो घरों का इकलाता चिराग भी बुझ गया। आयुष और असजद अपने माता पिता के इकलौते बेटे थे। हादसे में इसी गांव के अलग अलग परिवारों के तीन बच्चों की मौत से गांव में मातम छाया है। तीनों परिवारों की माली हालत ठीक नहीं हैं। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने मृत बच्चों के परिजनों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया है। हादसे में मृत आठ वर्षीय आयुष अपने माता पिता का इकलौता बेटा था। उसकी बहन सोनाली ननिहाल में रहकर पढ़ाई करती है। पिता पिता बाजार की दुकान पर मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। जबकि असजद भी अपने मां बाप का इकलौता बेटा था। असजद चार बहनों के बीच अकेला भाई था। बहन ऑलफिन (12), अमरीन (10), अपसा (6) और अजरा 2 वर्ष की है। असजद के पिता मुम्बई में अपना ब्यापार करते हैं। इसी हादसे में मृत हारिश दो भाई में बड़ा था । उसके पिता त्रिलोचन बाजार में मेडिकल स्टोर चलाकर परिवार चलाते हैं।
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लापरवाही से हुआ हादसा
जलालपुर। रेहटी गांव में बाउंड्रीवाल ढहने से तीन बच्चों की मौत की घटना लापरवाही का नतीजा है। ग्रामीणों की माने तो मकान मालिक और जेसीबी चालक दोनों की ही लापरवाही से हादसा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस दिन बालू गिराया गया था उसी दिन गांव के लोगों ने रास्ते से बाल हटाने को कहा था। बालू गिराते समय ट्रक के धक्के से ही बाउंड्रीवाल कमजोर हो गई थी। बावजूद इसके कोई एहतियात नहीं बतरा गया। जेसीबी चालक और मकान मालिक की लापरवाही से टूटी दावील के अंदर ही बालू भरा जा रहा था। बालू का दबाव अधिक हुआ तो दीवार ढह गई और हादसा हो गया।