जौनपुर। पुलिस के आला अफसर जनता को मित्र बनाने के बड़े-बड़े दावे करते लेकिन उनके मातहत ही उन दावों की हवा निकाल देते हैं। गुरुवार को एक कोतवाल को लिफ्ट न देने पर सिकरारा पुलिस ने साहित्यकार डा. अरुणेश नीरन, देवरिया रामलीला समिति के अध्यक्ष मन्नन प्रसाद आदि लोगों को बेवजह थाने पर रोक लिया। कागजों में कमी न मिलने उनसे सीट बेल्ट न लगाने के नाम पर एक हजार रुपए जुर्माना ठोक दिया।
देवरिया निवासी वरिष्ठ साहित्यकार डा. अरुणेश नीरन, देवरिया रामलीला समिति के अध्यक्ष मन्नन प्रसाद आदि मित्रों के साथ इनोवा गाड़ी से चित्रकूट जा रहे थे। इलाहाबाद रोड स्थित सीहीपुर क्रासिंग पर एक सिपाही ने उनकी गाड़ी को रोका। बोला कोतवाल साहब को इलाहाबाद जाना है, आप लेते जाओ। उन्होंने कहा कि ठीक है साइड में गाड़ी रोकते हैं जल्दी बुलाओ। थोड़ी देर बाद जब कोतवाल नहीं आए तो उन्होंने अपनी गाड़ी आगे बढ़वा दी। अभी वह सिकरारा पहुंचे थे कि पुलिस ने उनकी गाड़ी रोक ली।
डा. नीरन ने पूछा कि क्या बात है, तो रौब दिखाते हुए दरोगा ललित सिंह ने कहा कि गाड़ी से नीचे उतरो और कागज दिखाओ। मन्नन प्रसाद और उनके चालक ने डीएल, बीमा, गाड़ी के कागज और प्रदूषण का फिटनेस दरोगा को दिखाया तो उसने कहा कि सीट बेल्ट नहीं लगाए हो जुर्माना दो। मन्नन प्रसाद ने कहा कि कितना देना है तो उसने कहा कि थाने के अंदर जाओ मुंशी बताएगा। वे थाने में गए तो एक हजार रुपए ले लिये गये। उन्होंने रसीद मांगी तो कहा गया कि आधा घंटा रुकना होगा। सभी को आधा घंटा बैठाने के बाद रसीद दी गई। नियम है कि सीट बेल्ट न लगाने पर सौ रुपए न्यूनतम और अधिकतम तीन सौ रुपए जुर्माना लगाया जा सकता है। बावजूद इसके सिकरारा पुलिस ने एक हजार रुपये वसूले और सीनियर सिटीजन को परेशान किया।
गंभीर मामला है। इसकी जांच बैठा दी गई है। अगर पुलिसकर्मियों ने सीनियर सिटीजन के साथ इस तरह की हरकत की है तो जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। - दिनेश पाल सिंह, एसपी