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महिला प्रधान व पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश

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जौनपुर। खेतासराय थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी व जालसाजी का मामला प्रकाश में आया है। पोरईकला गांव की प्रधान खुद अपनी अधिक उम्र कागजों में दर्शाकर वृद्धा पेंशन लेती रही। यहां तक कि ग्राम प्रधान के चुनाव में भी गलत उम्र दर्शाकर चुनाव जीत गई। इस संबंध में गांव के ही उमाशंकर मिश्र ने फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। सीजेएम ने महिला प्रधान व उसके पति के खिलाफ 24 घंटे में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना का आदेश थानाध्यक्ष खेतासराय को दिया है।
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उमाशंकर मिश्रा निवासी ग्राम पोरईकला थाना खेतासराय ने कोर्ट में धारा 156(3) के तहत अधिवक्ता विजय नारायण सिंह के माध्यम से प्रार्थना पत्र दिया कि ग्राम प्रधान शीला की जन्मतिथि आधार कार्ड के अनुसार 17 अक्तूबर 1980 है। निर्वाचन कार्ड में भी लगभग यही उम्र है। 2009 में शीला व उसके पति राधेश्याम ने जालसाजी करके वृद्धा पेंशन प्राप्त का अनुचित लाभ लेने के लिए कूटरचित दस्तावेज रचा। शीला ने वृद्धा पेंशन के प्रार्थना पत्र व शपथ पत्र में अपनी उम्र 65 वर्ष दर्शाया जबकि वह आधार व निर्वाचन के आधार पर 29 वर्ष की थी। ऐसा उसने इसलिए किया क्योंकि वृद्धा पेंशन साठ वर्ष से अधिक उम्र एवं गरीबी रेखा के नीचे के लोगों को ही मिलता है। जबकि वह गरीबी रेखा के ऊपर है। उसने आवेदन खंड विकास अधिकारी शाहगंज में प्रस्तुत किया। वह 2009-2010 से पेंशन प्राप्त करने लगी। 2015 में पोरईकला के प्रधान पद के प्रत्याशी के रूप में उसने पर्चा दाखिल किया जिसमें शपथ पत्र में उम्र 44 वर्ष दिखाया जबकि आधार व निर्वाचन से वह 35 वर्ष की थी। पति-पत्नी ने कूटरचित शपथ पत्र दाखिल कर किया। 2015 में शीला चुनाव जीत गई। प्रधान बनने के बाद भी वह खेतासराय के सोंधी स्थित काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक से पेंशन लेती रहीं। वादी की आपत्ति पर वृद्धा पेंशन अक्तूबर 2016 में रोक दी गई। 2016 में वह 36 वर्ष की थी। थानाध्यक्ष खेतासराय व पुलिस अधीक्षक को दरखास्त के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हुई तब वादी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जहां कोर्ट ने केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
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