जौनपुर। वाराणसी में मंगलवार को हुए फ्लाईओवर हादसे में जिले के पांच लोगों जान चली गई। इसमें एक ही परिवार के चार सदस्य हैं। वे परिवार की महिला का इलाज कराने गए थे। किसे पता था कि लौटते समय जिंदगी हत्यारी बीम सबकी जिंदगी छीन लेगी। गांव में पोस्टमार्टम के बाद शव पहुंचा तो कोहराम मच गया। अलग-अलग घाटों पर अंतिम संस्कार के वक्त माहौल गमगीन हो गया।
सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भड़ौर गांव निवासी रघुनाथ बहेलिया की पत्नी विद्या देवी (50) बीमार थीं। परिवार के लोग उनको इलाज के लिए वाराणसी गए थे। वहां निजी अस्पताल में विद्या को दिखाने बाद लौटते समय उनकी बोलेरो कार रघुनाथ का बेटा अरुण कुमार (25) चला रहा था। उसमें रघुनाथ, विद्या देवी के अलावा खुटहन थाने के वंदनपुर निवासी रामचेत (40) और उसी गांव के रामचंद्र पासवान (49) सवार थे। रामचेत रघुनाथ का बहनोई था। वे लोग लहरतारा से कैंट की ओर जा रहे थे। कैंट स्टेशन से पहले पहुंचे थे की फ्लाईओवर का बीम उनकी बोलेरो पर गिर गया। बोलेरो में ही सभी कुचल गए। रात में ही मौत की खबर यहां आई। उसके बाद परिवार के लोग बनारस पहुंच गए। बुधवार को सुबह से ही शोक संवेदना व्यक्त करने वालों की भीड़ उनके घर पर जुटने लगी थी। पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर परिवार के सदस्य घर पहुंचे सब रोने लगे। पूरा माहौल गमगीन हो गया।
वंदनपुर के रहने वाले रामचेत और रामचंद्र पासवान का अंतिम संस्कार गोमती नदी के पिलकिछा घाट पर किया गया जबकि रघुनाथ, उनकी पत्नी और बेटे का अंतिम संस्कार बेलवा घाट पर किया गया। रघुनाथ के भाई यदुनाथ राम बिजली विभाग में अधिशासी अभियंता हैं। वह मिर्जापुर में तैनात हैं।
अरुण की अगले महीने थी शादी
जौनपुर। भड़ौर गांव में रघुनाथ, विद्या देवी और अरुण उर्फ सिकंदर की अर्थी दिन में ढाई बजे उठी तो गांव के लोग रो पड़े। अरुण बोलेरो चलाता था। उसी गाड़ी से मां के इलाज के लिए पिता और रिश्तेदार के साथ वाराणसी गया था। अगले महीने में 13 जून को अरुण की शादी होनी थी। उसकी शादी इसी इलाके के मोलनापुर गांव में घर में शादी की तैयारियां चल रही थी। मगर हादसे से मांगलिक कार्य की खुशी गम में बदल गई। मोलनापुर गांव में भी मातम पसर गया। तीन भाइयों में सबसे छोटा अरुण ही था। अरुण का बड़ा भाई सुरेंद्र (30) नलकूप विभाग में आपरेटर है जबकि मझला भाई वीरेंदर इलाहाबाद में इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा है। अरुण कड़ाला निवासी प्रभाकर यादव की गाड़ी चलाता था।
मुखिया विहीन हो गए परिवार
खुटहन। फ्लाईओवर हादसे में मारे गए वंदनपुर के रामचेत और रामचंद्र की मौत से दो परिवार मुखिया विहीन हो गए। रामचेत की भड़ौर गांव निवासी रघुनाथ के यहां ससुराल जब परिवार के लोग विद्या लेकर वाराणसी जाने लगे तो वह भी बोलेरो में सवार हो गए। उनको वाराणसी में अपनी बेटी से मिलना था। परिवार के लोग अस्पताल गए और रामचंद्र बेटी से मिलने चले लगे। शाम को सब एक साथ गांव लौटने लगे तो किसी मालूम था कि वे कभी लौट नहीं पाएंगे। रामचेत की मौत से जहा पत्नी प्रमीला देवी पर बज्रपात सा हो गया है। वहीं उनके पुत्र सचिन (22), मोहित (19), सोहित (16) और विवाह योग्य हो चली दो पुत्रियां रीमा (20) व अंतिमा (18) के सिर से पिता का साया छिन गया। उनके पड़ोसी रामचंद्र की पत्नी निशा रोते रोते बेहोश हो जा रही हैं। माता सरयू देवी पुत्र के गम मे विक्षिप्त सी हो गई हैं। परिवार में छह साल की बेटी पिंकी है, जिसको संभालना मुश्किल हो गया था।
सत्य का सामना कठिन हो गया
जौनपुर। रघुनाथ के बड़े पुत्र सुरेंद्र के वाट्सऐप पर वाराणसी में फ्लाईओवर के बीम के गिरने की सूचना मिली तो उन्हें अपने परिजनों की चिंता सताने लगी। उन्होंने छोटे अरुण को उन्होंने फोन लगाना शुरू किया लेकिन जवाब नहीं मिला। हादसे की सूचना उन्होने इलाहाबाद में रहकर तैयारी कर रहे मझले भाई वीरेंद्र को हादसे की सूचना दी। तब तक उन्हें यह नहीं पता था कि उनके परिवार के लोग भी इसके शिकार हो गए हैं। परिवार के लोग देर तक नहीं पहुंचे और संपर्क नहीं हो पाया तो वह वाराणसी आ गए। माता-पिता को खोजते हुए बीएचयू तक गए। जब उन्हें पता चला कि हादसे में उनके परिवार के लोग शिकार हो गए हैं तो उनके पांव तले की जमीन खिसक गई।