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ट्रूनट मशीन की जांच में डॉक्टर हुए कोरोना पॉजिटिव, अस्पताल सील

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09- जिला अस्पताल में चिकित्सक के कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल के इमरजेन्सी के पीपीई किट पहन - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। आपात स्थिति में गंभीर रोगियों की कोरोना जांच के लिए जिला अस्पताल में लगाई गई ट्रूनट मशीन में एक डॉक्टर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। डॉक्टर जिला अस्पताल में फिजिशियन के रुप में तैनात हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी इसे कोरोना संक्रमित मरीजों की सूची में शामिल नहीं किया है। डॉक्टर का सैंपल लेकर लखनऊ भेजा गया है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वह संक्रमित हैं या नहीं। फिलहाल एहतियात के तौर पर डॉक्टर को क्वारंटीन में भेज दिया गया है। मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी ठप रही। चारों तरफ से इस क्षेत्र को सील कर सैनिटाइज कराया गया। इमरजेंसी में भी चिकित्सक-कर्मचारी पीपीई किट से लैस होकर उपचार करते रहे।
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शनिवार को जिला अस्पताल में कोविड-19 जांच लैब स्थापित की गई थी। इसमें ट्रूनट मशीन से कोरोना के परीक्षण की व्यवस्था की गई है। मशीन से सिर्फ गंभीर रोगियों की कोरोना जांच होनी है, जिससे उनका उपचार तत्काल शुरू किया जा सके। रविवार को शासन की ओर से कोरोना से जुड़ी ड्यूटी कर रहे सभी स्वास्थ्यकर्मियों की जांच कराने के फरमान के बाद सोमवार को अस्पताल के 16 चिकित्सक व कर्मचारियों के सैंपल लिए गए थे। ट्रूनट मशीन से सबकी जांच की गई। इसमें एक फिजिशियन की रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही हड़कंप मच गया। डॉक्टर ने ओपीडी में सैकड़ों मरीजों का उपचार किया है। उनकी तैनाती शाहगंज में भी थी। वहां भी कई मरीजों का उपचार किया। ट्रूनट मशीन की जांच रिपोर्ट अगर लैब में आने वाली रिपोर्ट से भी मिलती है तो स्वास्थ्य विभाग के साथ ही प्रशासन के लिए भी बड़ा संकट आ जाएगा। सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों को चिह्नित करने में होगी, जिनका उपचार चिकित्सक के माध्यम से हुआ है। एक दिन पहले ही चिकित्सक के आवास पर उपचार के दौरान एक महिला की मौत हुई थी, जिसके बाद परिजनों ने हंगामा भी किया था। इसके अगले ही दिन ट्रूनट मशीन की रिपोर्ट आने से खलबली मच गई है।
ठप रही ओपीडी, इमरजेंसी में पीपीई किट पहन किया उपचार
जौनपुर। जिला अस्पताल के ओपीडी क्षेत्र को मंगलवार की सुबह ही चारों तरफ से सील कर दिया गया। किसी को भी उस क्षेत्र में जाने की इजाजत नहीं दी गई। उपचार के लिए दूर-दराज से आए मरीज बैरंग लौट गए। डीएम के निर्देश पर सीआरओ डॉ. सुनील कुमार वर्मा ने नगर पालिका और फायर ब्रिगेड की टीम के साथ पूरे परिसर को सैनिटाइज कराया। हालांकि इमरजेंसी सेवा चालू रही। यहां तैनात डॉक्टर-कर्मचारी पीपीई किट में लैस होकर मरीजों का उपचार कर रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के जेडी व जिले के नोडल अधिकारी डॉ. जीसी द्विवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में ओपीडी सिर्फ मंगलवार के लिए बंद की गई थी। दिन में सैनिटाइजेशन का कार्य हुआ है। बुधवार को फिर से अपने समय पर ओपीडी का संचालन होगा। डॉक्टर को क्वारंटीन में भेज दिया गया है। उनकी सेहत पर निगरानी रखी जा रही है। अस्पताल के अन्य चिकित्सकों-कर्मचारियों की भी जांच कराई जाएगी।
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रिपोर्ट आने के बाद भी मरीजों को देखते रहे चिकित्सक
शाहगंज। जिला अस्पताल की ट्रूनट मशीन से फिजिशियन की रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी सुबह ही उन्हें दे दी गई थी। बावजूद वह शाहगंज में आवास पर मरीजों का उपचार करते रहे। इसके चलते सीएचसी के चिकित्सक-कर्मचारी सहमे हुए हैं। मूल रुप से आजमगढ़ जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के निवासी फिजिशियन की पूर्व में शाहगंज में ही चिकित्साधीक्षक के रुप में तैनाती थी। बाद में उन्हें जिला अस्पताल में नियुक्त कर दिया गया। बावजूद उन्होंने अपर निदेशक से खुद को शाहगंज में भी संबद्ध कराए रखा। इसी आधार पर वह सीएचसी परिसर में बने आवास में भी रह रहे हैं। यहीं से वह जिला अस्पताल जाकर ड्यूटी करते हैं। विभागीय लोगों के मुताबिक चिकित्सक ड्यूटी जाने से पहले और लौटने के बाद अपने आवास पर ही मरीजों को प्राइवेट रुप से देखते हैं। सोमवार की शाम यहीं पर उपचार के दौरान एक महिला की मौत भी हुई थी। कई बार उन्हें विभागीय अफसरों ने हिदायत भी दी, बावजूद उनका रवैया नहीं बदला। मंगलवार को जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो चिकित्सक को भी इसकी सूचना देते हुए तत्काल क्वारंटीन में जाने का निर्देश दिया गया, बावजूद वह काफी देर तक अपने आवास पर मरीजों का उपचार करते रहे। चिकित्सक के संक्रमित होने की आशंका से अनजान मरीज अपना उपचार कराने में मशगूल रहे। इस बाबत चिकित्साधीक्षक डॉ. उमाकांत सान्याल का कहना था कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उनसे कमरा नहीं खाली कराया गया था। प्राइवेट प्रैक्टिस के बाबत पूछे जाने पर बोले कि कई बार मौखिक रूप से मना किया गया। उच्चाधिकारियों से भी इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।
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