जौनपुर। अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट (प्रथम) उमेश कुमार द्वितीय की अदालत ने जफराबाद थानाध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। छेड़खानी और पॉक्सो एक्ट के एक मामले में घटना के डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल न करने और अदालती आदेशों की अनदेखी पर कोर्ट ने थानाध्यक्ष के खिलाफ अवमानना का वाद दर्ज किया है। साथ ही, एडीजी वाराणसी जोन को दोषी पुलिसकर्मी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया है। पीड़िता की मां ने कोर्ट में गुहार लगाई थी कि 6 अगस्त 2024 को उसकी 16 वर्षीय बेटी के साथ स्कूल से घर लौटते समय सचिन निषाद और चंदन निषाद (निवासी मनहन, जलालपुर) ने अश्लील हरकतें कीं और उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाने का प्रयास किया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर सचिन को जेल भेजा, जो बाद में जमानत पर छूट गया, जबकि दूसरा आरोपी अब तक फरार है। पीड़िता के परिवार का आरोप है कि आरोपी अब उन पर सुलह का दबाव बना रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। जफराबाद पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। नियमानुसार पॉक्सो एक्ट के मामलों में दो महीने के भीतर विवेचना पूरी कर चार्जशीट दाखिल करनी होती है लेकिन यहां डेढ़ साल बाद भी फाइल दबी रही। अदालत ने थानाध्यक्ष से इस देरी पर स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन उन्होंने न तो कोई आख्या दी और न ही कोर्ट में उपस्थित हुए। इसे न्यायिक आदेशों की अवहेलना मानते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 तय की है।