जौनपुर। कोरोना संक्रमण के चलते विश्वविद्यालय की परीक्षाओं पर भी ग्रहण लगा है। पिछले सत्र में भी बिना परीक्षाएं कराए ही छात्रों को प्रोन्नत कर दिया गया था। वर्तमान सत्र में भी परीक्षा होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। अब अंतिम वर्ष के छात्रों का रिजल्ट किस आधार पर तैयार हो, इसे लेकर पेच फंस गया है। ऐसे में शासन ने विश्वविद्यालयों की परीक्षा और रिजल्ट पर निर्णय लेने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। समिति वर्तमान हालात को ध्यान में रखकर यह निर्णय लेगी कि परीक्षाएं कैसे कराई जाएं और अगर परीक्षा कराना संभव नहीं हुआ तो उसके बाद क्या विकल्प होगा।
विश्वविद्यालय में 15 मई तक शासन के निर्देश पर अवकाश घोषित किया गया है, लेकिन अभी तक कोरोना संक्रमण को देखते हुए शासन का न तो अवकाश बढ़ाने और न ही परीक्षा कराने के लिए ही कोई नया शासनादेश आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन शासन के नए आदेश का इंतजार कर रहा है। वर्ष 2019-20 में कोरोना संक्रमण के कारण परीक्षाएं नहीं हो पाई थी। शासन के निर्देश पर छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत कर दिया गया। अब 2020-21 की मुख्य और सेमेस्टर परीक्षाओं पर भी ग्रहण लगता नजर आ रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया है। परीक्षा की तैयारी भी नहीं हो पाई है। विश्वविद्यालय सूत्रों की मानें तो शासन ने परीक्षा और रिजल्ट पर निर्णय लेने के लिए तीन विश्वविद्यालयों के कुलपति की समिति का गठन कर दिया है। समिति के निर्णय के बाद ही विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ निर्णय ले सकेगा।
---
यूजी और पीजी अंतिम वर्ष का फंसेगा रिजल्ट
जौनपुर। स्नातक द्वितीय और स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्रों को पिछले वर्ष प्रोन्नत कर दिया गया था। स्नातक तृतीय वर्ष और स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं चालू सत्र में भी होने की संभावना नहीं दिख रही है। बिना परीक्षा कराए इनका रिजल्ट कैसे घोषित किया जाए इसे लेकर समस्या खड़ी हो सकती है। परीक्षा और रिजल्ट पर छात्र भी दुविधा की स्थिति में हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की निगाह भी शासन से गठित तीन सदस्यीय समिति पर टिकी हुई है। परीक्षा और रिजल्ट पर अधिकारी भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।