तहसील पर खतौनी को लेकर किसानो ने कहा कि निर्धारित शुल्क से अधिक वसूला जा रहा है। इसके साथ ही समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। इतना ही नहीं दोपहर एक बजे के बाद सेवा नहीं मिल रही है।
केराकत तहसील मुख्यालय पर खतौनी दफ्तर में किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूर-दराज गांवों से आए काश्तकारों को खतौनी निकलवाने के लिए घंटों लंबी कतार में खड़े रहना पड़ता है।
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किसानों का आरोप है कि दोपहर 1 बजे के बाद खतौनी नहीं मिल रही है। उन्हें अगले दिन दोबारा आना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
सरकारी तौर पर निर्धारित शुल्क 15 रुपये से पांच रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं। इससे किसानों में नाराजगी है। काउंटर पर बैठे प्राइवेट कर्मी मनमाने ढंग से अतिरिक्त पैसे वसूल रहे हैं। किसानों की शिकायतों को अनदेखा कर रहे हैं। लगातार हो रही अव्यवस्थाओं के कारण किसानों और कर्मचारियों के बीच तू-तू, मैं-मैं की नौबत आ जाती है।
किसान संतोष कुमार यादव निवासी सरकी व राकेश यादव निवासी सुल्तानपुर का कहना है कि उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खतौनी निकालने की प्रक्रिया को सुचारू किया जाए और अतिरिक्त शुल्क वसूली पर रोक लगाई जाए। तहसीलदार महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि खतौनी देने की प्रक्रिया एक बजे तक चलती है और अतिरिक्त शुल्क का आरोप गलत है।