होली का पर्व हो तो जश्न सिर चढ़कर बोलता है। ऐसे में भला कोई भी अपने को कैसे संभाल सकता है। क्या बच्चे, बड़े और बुजुर्ग सभी होली के रंग में रमे नजर आए।
बच्चों की पिचकारी बुधवार को ही निकल गई। रंग न सही तो पानी भरी पिचकारी ही चली। एक दिन पहले ही पिचकारी लेकर बच्चों की धमाचौकड़ी सड़कों पर शुरू थी।
शुक्रवार को हर कोई नीला पीला नजर आएगा। गुरुवार को देर रात हवन पूजन के साथ होलिका जलाई गईं। होलिका से पहले लोगों ने जम कर आतिशबाजी की और जगह-जगह फगुआ हुआ। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में होलिका दहन
की गई। एक पखवारे से चल रहे होली पर्व की तैयारियां पूर्व संध्या तक जारी रहीं। मीठे और नमकीन बनाने खरीदने का क्रम पूरी रात चला। नवाबी गुझिया, गुझिया कचौड़ी, दही बड़ा सहित अन्य पकवान बनाने में महिलाएं व्यस्त रहीं।
रसीले व्यंजन मिठाई की दुकानों पर भी खूब बिके। किराना की दुकानों पर रंग गुलाल और पिचकारी खरीदने वाले ग्राहकों से दिन भर बाजार गुलजार रहे। खास तौर पर छोटे बच्चों का उत्साह देखते बन रहा था।
शहर के कुछ इलाकों में ढोल मजीरे के साथ पूजा समिति से जुडे़ लोगों ने चंदा जुटाया। देर शाम तक मुहूर्त पर पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के बाद होलिका दहन कराया। इससे पहले लोगों ने जमकर आतिशबाजी की।