करंजाकला। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय द्वारा संचालित शैक्षणिक प्रशासन की नीतियों को लेकर स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रबंधकों में गहरा असंतोष है। विवि प्रशासन द्वारा लगाए जा रहे विलंब शुल्क और अर्थदंड के खिलाफ कॉलेज प्रबंधकों के महासंघ ने बुधवार को आपात बैठक बुलाई।
बैठक में दर्जनों महाविद्यालयों के प्रबंधक उपस्थित रहे। प्रबंधकों ने खुलकर विवि की नीतियों पर सवाल उठाए और इसे शिक्षा के लिए खतरनाक बताया।
खासकर वह स्थिति जब विवि द्वारा अस्थायी रूप से मान्यता बढ़ाने के बावजूद भी महाविद्यालयों से 30,000 प्रतिवर्ष अर्थदंड के रूप में वसूला जा रहा है। प्रबंधकों का कहना था कि यह दंड न तो शासनादेश के तहत है और न ही विवि के पास इसका कोई वैध आधार है, फिर भी इसे जबरन थोपा जा रहा है।
बैठक में उपस्थित कई प्रबंधकों ने एक सुर में कहा कि इन नीतियों के कारण महाविद्यालयों का संचालन असंभव होता जा रहा है। एक प्रबंधक ने तो यहां तक कह दिया कि ऐसे में कॉलेज बंद कर चाभी विवि को ही सौंप देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विवि के पास न तो समस्याएं सुनने का समय है और न ही समाधान की इच्छाशक्ति। विलंब शुल्क और अर्थदंड की शृंखला पिछले कुछ वर्षों से लगातार चल रही है। विवि ने हर छोटे-बड़े कार्य में विलंब शुल्क जोड़ कर कॉलेजों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है।
परीक्षा फार्म विलंब से भरने पर, प्रयोगशाला शुल्क विलंब से जमा करने पर, प्रोविजनल पत्र लेने में देरी होने पर-हर जगह अर्थदंड की लंबी सूची सामने आती है। यह कॉलेजों की वित्तीय हालत को पूरी तरह जर्जर कर रहा है। प्रबंधकों ने यह भी आरोप लगाया कि विवि के कुछ अधिकारियों की संलिप्तता प्राइवेट एजेंसियों और दलालों से है, जो महाविद्यालयों को परेशान कर दलाली से लाभ कमाने में जुटे हैं। ऐसे में जब कोई कॉलेज नियमों के अनुरूप चलने की कोशिश करता है तो उसे ही परेशान किया जाता है।
इस बैठक में महासंघ के संरक्षक अशोक दुबे, भूपेंद्र यादव, मनीष यादव, विनय सिंह, विनोद तिवारी, रत्नेश तिवारी, संजय सिंह, राघवेंद्र कुमार, अंजनी राजकुमार मौर्य सहित पूर्वांचल क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन कॉलेजों के प्रबंधक मौजूद रहे।