दो दिन की राहत के बाद मौसम का शनिवार को अचानक फिर मिजाज बदल गया। शीतलहर और बदली के चलते गलन ऐसी बढ़ी कि लोग ठिठुरने लगे। न्यूनतम पारा छह डिग्री तक पहुंच गया।
ठंडी हवाओं ने सड़कों पर आने-जाने वाले दोपहिया वाहन चालकों के चेहरे सुर्ख कर दिए। रेल और सड़क यातायात बुरी तरह बेपटरी हो गई।
कई लोगों की जान लेने के बाद जिले में ठंड का सितम जारी है। हाड़ कंपा देने वाली ठंड में सबसे ज्यादा परेशानी निम्न और बेघर लोगों की बढ़ी है। चट्टी-चौराहों और फुटपाथ पर रात गुजारने वालों के लिए ठंड मुसीबत बनकर टूटी
है। शहर के शाही पुल पर स्थित कोठरियों में रात गुजारने वाले बेसहारा लोगों की फजीहत इस ठंड में कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। मौसम की बढ़ती तल्खी के चलते बेघरों और रिक्शा चालकों का यह ठिकाना भी छिनता दिख रहा है।
ठंड और घने कोहरे ने ट्रेनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगाया है। शनिवार को कोहरे के कारण जिले के प्रमुख स्टेशनों भंडारी, जौनपुर सिटी और जंघई में दर्जन भर से अधिक ट्रेनें विलंबित रहीं।
इस दौरान स्टेशनों पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों की भी मुश्किलें बढ़ गईं। यात्री जहां-तहां दुबके रहे। तमाम सार्वजनिक स्थानों पर लोग अलाव के सहारे ठंड भगाने की कोशिशों में जुटे रहे। पाला गिरने की आशंका से किसानों
की चिंता भी बढ़ गई है। बक्शा क्षेत्र के गड़हां गांव के किसान राजदेव विश्वकर्मा ने कहा कि ठंड को देखते हुए आलू और तिलहन-दलहन की खेती पर संकट बढ़ सकता है। ओला गिरा तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी। मगरेसर निवासी रामलखन
यादव ने भी आलू को पाला मारने की आशंका जताते हुए कहा कि किसानों की गाढ़ी कमाई ठंड मिट्टी में मिलाने पर उतारू है। उधर कृषि के जानकारों का कहना है कि इस मौसम में फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को विशेषज्ञों की राय लेनी चाहिए।