जौनपुर। शहर में सीवर लाइन बिछाने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण की योजना विवादों के घेरे में आ गई है। कार्य शुरू होने के कुछ दिन बाद ही डिजाइन को त्रुटिपूर्ण बताकर निर्माण बंद कर दिया गया। डिजाइन में गड़बड़ी का मामला हाईकोर्ट तक मामला पहुंचने के बाद आनन-फानन में काम बंद कर डिजाइन में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कराई गई है।
गोमती को स्वच्छ बनाने के लिए इसमें गिरने वाले नालों को बंद करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। व्यापक आंदोलनों के बाद शासन ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए करोड़ों की योजना को मंजूरी दी। जलनिगम को नोडल संस्था नामित करते हुए यह निर्देश दिया गया कि सर्वे कर इसकी डीपीआर तैयार कर लें, जिसके बाद ही कार्य आरंभ कराएं। बताते हैं कि बंद कमरे में सर्वे की औपचारिकता निभाते हुए डीपीआर स्वीकृत करा ली गई। इस बारे में न तो स्थलीय सत्यापन किया गया और न ही प्रभावित लोगों से सुझाव लिए गए। चहेती संस्था को सर्वे की जिम्मेदारी सौंप इस मद में भुगतान भी कर दिया। आनन-फानन में तैयार डीपीआर से काम भी आरंभ कर दिया गया। कार्य शुरू होने के बाद जब जानकारी हुई तो लोग हैरान रह गए। सर्वे की विसंगतियों को लेकर गत माह हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधितों को नोटिस भेजकर तलब किया। मामले में 12 फरवरी को सुनवाई होनी है। हाईकोर्ट के रुख को देखते हुए डिजाइन में खामियां बताकर काम रोक दिया गया है। स्वच्छ गोमती अभियान के संयोजक गौतम गुप्ता का कहना है कि काम शुरू होने के तत्काल बाद इसे बंद करना विसंगतियों को स्पष्ट कर रहा है। अगर सब ठीक था तो काम क्यों बंद कराया गया। डिजाइन में खामी की जानकारी मामला कोर्ट पहुंचने के बाद भी सामने कैसे आई, समझ से परे है। उन्होंने इस मामले में शासन-प्रशासन से जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उधर, जलनिगम के एक्सईएन सुनील कुमार यादव का कहना था कि डिजाइन में तकनीकी दिक्कत की जानकारी होते ही काम रोक दिया गया और संशोधन के लिए विशेषज्ञ के पास नक्शा भेजा दिया गया है। जल्द ही संशोधित प्रस्ताव पास होते ही काम आरंभ करा दिया जाएगा।