चीनी मांझा- जिला अस्पतताल में रोते बिलखते मृतक के परिजन। संवाद
- फोटो : 1
जौनपुर। चीनी मांझा आसमान में ब्लेड की तरह काम करता है। चीनी मांझे से 34 दिनों में दो लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में प्राइवेट प्रधानाध्यापक और चिकित्सक शामिल हैं। दोनों हादसे करीब दो किलोमीटर के दायरे में हुए। जबकि चीनी मांझे से कई लोग जख्मी होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। 11 दिसंबर को शास्त्री ब्रिज (नए पुल) पर शहर कोतवाली क्षेत्र के उमरपुर निवासी और फतेहगंज स्थित एक निजी स्कूल में प्रधानाचार्य संदीप त्रिपाठी (45) का गला पतंग के चीनी मांझे ने रेत दिया था। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। वह अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने के बाद स्कूटी से हेलमेट लगाकर घर लौट रहे थे। इस घटना के 34 दिन बाद इसी मार्ग पर करीब दो किमी दूर पचहटिया तिराहे के पास बुधवार को फिजियोथेरेपिस्ट समीर हाशमी की जान चीनी मांझे ने ले ली। समीर भी बाइक पर हेलमेट लगाकर जा रहे थे। इससे पहले भी कई लोग चीनी मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो चुके हैं। इस घटना के बाद लोगों को 2017 का सिंतबर महीना याद आ गया, जब शहर में ही उत्तम दूबे (18) की चीनी मांझे की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके बाद कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनके निशान आज भी लोगों के शरीर पर देखने को मिलते हैं।