जौनपुर। निजामुद्दीन की मरकज से लौटकर शहर के लाल दरवाजा इलाके में छिपे 14 बांग्लादेशी समेत 16 जमातियों पर हत्या के प्रयास का मुकदमा भी दर्ज हो गया है। इनके विरुद्ध पासपोर्ट अधिनियम और लॉक डाउन तोड़ने के आरोप में पहले से ही केस दर्ज है। सभी जमाती फिलहाल प्रसाद इंस्टीट्यूट में बने अस्थाई जेल में क्वारंटीन में रखे गए हैं। क्वारंटीन अवधि पूरी होते ही पुलिस उन्हें रिमांड पर लेगी। जमातियों को मकान में शरण दिलाने वाले युवक पर भी पुलिस ने इसी धारा में केस दर्ज किया है।
मरकज में कोरोना संक्रमण फैलने की सूचना के बाद ही सरकार ने एलान किया था कि जो भी लोग तब्लीगी जमात में शामिल होकर आए हैं, वे स्वत: सामने आकर जांच करा लें। कई बार इसके लिए घोषणा कराई गई। बावजूद जमाती जगह-जगह छिपकर रह रहे थे। 29 मार्च को मुखबिर की सूचना पर सरायख्वाजा पुलिस ने लाला दरवाजा मस्जिद के समीप एक मकान से 16 जमातियों को पकड़ा था। इसमें 14 बांग्लादेशी नागरिक थे, जबकि दो लोग गाइड के रुप में उनके साथ थे। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद इनके सैंपल जांच को भेजे गए, जिसमें दो की रिपोर्ट कोरोना पॉजीटिव आई। सभी के विरुद्ध पासपोर्ट अधिनियम के अलावा लॉक डाउन तोड़ने, संक्रमण फैलाने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। पूछताछ में सामने आया कि जिस मकान में वह रहे थे, उसका स्वामी केराकत क्षेत्र का है। इस समय वह सऊदी में है। शहर कोतवाली के नसीम नामक युवक को उसने मकान की देखरेख का जिम्मा सौंपा था। नसीम ने ही सभी जमातियों को मकान में शरण दिया था। सरायख्वाजा थानाध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि बार-बार हिदायत के बाद भी जमाती छिप कर बैठे रहे। उन्होंने स्वयं बाहर निकलकर जांच कराने की पहल नहीं की। उनके कारण कई लोगों की जान को खतरा हो सकता था। उच्चाधिकारियों के निर्देशन में सभी 16 जमातियों और उन्हें शरण दिलाने वाले युवक पर हत्या के प्रयास का केस भी दर्ज कर लिया गया है। क्वारंटीन अवधि पूरी होते ही उन्हें रिमांड पर लिया जाएगा।