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दरी उद्योग का टूट रहा दम, काम को तरस रहे कारीगर, कारोबार हुआ कम

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रामनगर स्थित कालीन- दरी के कारखाने में काम करते श्रमिक। - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत चयनित दरी उद्योग के हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते ही जा रहे हैं। सरकार ने योजना में शामिल जरूर कर लिया लेकिन कोई सुविधा नहीं मुहैया कराई। कारोबार की बेहतरी के लिए किसी तरह का प्रोत्साहन नहीं मिदया गया। इस उपेक्षित उद्योग की हालत लॉकडाउन ने और बिगाड़ दी। लूम बंद हो रहे हैं और कारीगर काम को तरस रहे हैं। कामन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में है।
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कालीन नगरी भदोही से सटा होने के कारण जिले में भी दरी-कालीन के कारीगर बड़ी संख्या में हैं। मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र के रामपुर, रामनगर, मड़ियाहूं और बरसठी ब्लाक के दर्जनों गांवों के हजारों परिवार इस धंधे से जुड़े हैं। कोई खुद दरी-कालीन की बुनाई करता है तो कोई बिक्री-कच्चे माल की आपूर्ति का काम करता आ रहा है। चयन के वक्त मंशा थी कि कारीगर की अच्छी संख्या होने के कारण इस उद्योग को बढ़ावा देने में आसानी होगी। उनके कौशल को निखारकर कर उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाई जाएगी। विडंबना है कि योजना शुरू हुए तीन वर्ष बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं हुए हैं। यहां ज्यादातर छोटे कारोबारी हैं। वह बड़े कारोबारियों से आर्डर लेकर माल तैयार कराते हैं। कारोबारियों की मानें तो स्थितियां लगातार बिगड़ती जा रही हैं। पहले की अपेक्षा धंधा एक चौथाई तक सिमट कर रह गया है। रनापुर, भाऊपुर, गोपालापुर, धनंजयपुर, शेखपुर आदि गांवों में न कारीगरों के पास कोई काम नहीं है। आर्डर न मिलने से कारोबारी भी मायूस हैं। कच्चे माल की आपूर्ति भी मुश्किल होती जा रही है। कॉमन फैसलिटी सेंटर (सीएफसी) बनाने की योजना भी सिर्फ कागजों में रह गई है। अफसरों से जब भी इस बारे में चर्चा होती है, वह कागजी प्रक्रिया शुरू करने की दलील देकर चुप हो जाते हैं। ऐसा रहा तो यह उद्योग पनपने की बजाए, जल्द ही बंद हो जाएगा।
ओडीओपी में शामिल दरी-कालीन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास चल रहे हैं। संबंधित क्षेत्रों में कैंप लगाकर कारीगरों को प्रशिक्षण दिलाया गया है। कॉमन फेसिलिटी सेंटर के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही इसकी स्थापना कराई जाएगी। एक ही छत के नीचे सारी सुविधा मिलने से उद्यमियों की परेशानी दूर होगी। -साहब सरन रावत, उपायुक्त, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र
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