पांच विकास खंडों में चौथे चरण के जिला पंचायत के 23 वार्डों में होने वाले चुनाव में बसपा के अधिकृत प्रत्याशियों के लिए बागी प्रत्याशी मुसीबत बन गए हैं। ज्यादेतर कार्यकर्ता उन्हीं के साथ चुनाव प्रचार में लगे हैं।
वार्ड नंबर 27 में कई बागी उम्मीदवार मैदान में हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई करने का साहस पार्टी नहीं जुटा पा रही है। कारण कोई बड़े बसपा नेता की पत्नी है तो किसी पर बड़े नेता का वरदहस्त है।
सोमवार को बसपा नेताओं के दबाव में अपनी पत्नी अनीता सिद्धार्थ के खिलाफ पहली बार प्रचार करने बसपा नेता डा. लालबहादुर सिद्धार्थ गांव में गए।
महिलाओं ने जब उनसे पत्नी को लेकर सवाल किया तो वह पार्टी के फैसले की दुहाई देने लगे। चतुर्थ चरण में सुइथाकला के छह, शाहगंज के चार, खुटहन के चार, करंजाकला के पांच और बक्शा के चार वार्डों में चुनाव 29 नवंबर को होना है।
इस चरण में सबसे अधिक बागी प्रत्याशी अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में ताल ठोक रहे हैं। बसपा ने अधिकृत प्रत्याशी तो घोषित कर दिए लेकिन उनका प्रचार करने कोई बड़ा नेता कहीं नहीं जा रहा है।
उधर बागी प्रत्याशी आरोप लगा रहे हैं कि पैसे के बलपर लोग बसपा का अधिकृत प्रत्याशी बन बैठे हैं। उनकी बातों का समर्थन कार्यकर्ता भी कर रहे हैं।
बसपा के बड़े नेताओं के दबाव में सोमवार को जोनल कोआर्डिनेटर रामचंद्र गौतम, डा. लालबहादुर सिद्धार्थ वार्ड संख्या 27 से बसपा की अधिकृत उम्मीदवार सुनीता यादव के पक्ष में प्रचार करने के लिए क्षेत्र में गए।
इसी क्षेत्र से डा. सिद्धार्थ की पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अनीता सिद्धार्थ भी बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। कमोवेश ऐसी ही स्थिति अन्य क्षेत्रों में भी है। अगर स्थिति यही रही तो बसपा को मुश्किलों से जूझना पड़ सकता है।