इस गिरोह में जलालपुर थाना क्षेत्र के मुरलीपुर निवासी विनय यादव भी था, जो पहले आधार कार्ड बनाने का काम करता था, जिसके खिलाफ जलालपुर थाना क्षेत्र के असबरनपुर निवासी रतन कुमार ने 22 नवंबर को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि बेटी का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए विनय यादव से मुलाकात की थी। विनय ने जन्म प्रमाणपत्र तैयार करके दे दिया था। बाद में जन्म प्रमाणपत्र का सत्यापन सीएमओ ऑफिस, जौनपुर से करवाया तो पता चला कि यह प्रमाण पत्र फर्जी है। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि विनय यादव का एक गैंग है। दो दिसंबर को विनय यादव, रामभरत मौर्या और शाहबाज हसन को गिरफ्तार किया गया था।
जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का गिरोह व्हाट्सएप पर संचालित होता था। यह प्रमाणपत्र किस देश या स्थान के लोगों को जारी कर दिया गया है यह कह पाना मुश्किल है। हालांकि पुलिस को यह प्रमाण जरूर मिल गया है कि पश्चिम बंगाल में बैठे व्यक्ति का जन्म स्थान महाराष्ट्र में दिखाकर प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। यह जन्म प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश से जारी किया गया है। फिलहाल, ऐसे ही 500 प्रमाण पत्र पुलिस के हाथ लगे हैं, जिसे निरस्त करने के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा जा रहा है। एएसपी सिटी के मुताबिक यह व्हाट्सएप पर मैसेज पड़ता और उसे अमरोहा से ऑपरेट किया जाता था, जिसका एक्सेस लखनऊ या विहार से मिलता था।