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Jaunpur News: नगर पालिका की दुकानों में बड़ा खेल, 500 रुपये से कम में लेकर 10,000 में उठाई आगे

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जौनपुर। नगर पालिका जौनपुर की 498 दुकानों के किरायेदारी आवंटन में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां की 490 दुकानों से आज भी कौड़ियों के भाव किराया वसूला जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि मूल आवंटन पाने वाले 30 से 40 फीसदी लोगों ने खुद व्यापार करने के बजाय इन दुकानों को आगे (सब-लेट) 5,000 से 10,000 रुपये प्रति माह के किराये पर दूसरों को दे रखा है, जबकि वे खुद पालिका को 500 रुपये से भी कम मासिक किराया दे रहे हैं। साल 2021 में नगर पालिका के आय-व्यय की समीक्षा के दौरान इस खेल का खुलासा हुआ था। तत्कालीन मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) राजकुमार द्विवेदी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की थी। इस टीम में एसडीएम सदर, वरिष्ठ कोषाधिकारी और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी शामिल थे। जांच में नगर पालिका प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई थी। हालांकि, इसके बाद संबंधित अधिकारियों का स्थानांतरण हो गया और यह पूरी जांच ठंडे बस्ते में चली गई।
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नियमों का उल्लंघन : यह किरायेदारी व्यवस्था साल 1972-73 में 490 दुकानों के साथ शुरू हुई थी (बाद में 8 दुकानें और बढ़ीं)। नियमानुसार इन दुकानों को अधिकतम 30 साल के लिए ही किराये पर दिया जा सकता था।
लाखों का बकाया : पालिका प्रशासन दशकों से इस नियम की अनदेखी करता आ रहा है। समय सीमा खत्म होने के बाद भी न तो नए सिरे से आवंटन हुआ और न ही किराया बाजार दर के हिसाब से बढ़ाया गया।
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राजस्व को चपत : इस ढुलमुल रवैये के कारण नगर पालिका को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, और अब तक दुकानों का भारी किराया बकाया है।
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