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भागवत पुराण का मुख्य विषय भक्तियोग : डाॅ. आनंद दास

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सिंगरामऊ क्षेत्र के बहरीपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का विराम दिवस। स्रोत-संवाद
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सिंगरामऊ। बहरीपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचक डाॅ. आनंद दास महाराज ने कहा कि भागवत पुराण हिंदुओं के 18 पुराणों में से एक है। इसका मुख्य विषय भक्तियोग है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दर्शन करने के लिए भगवान शिव को गोपी का रूप धारण करना पड़ा। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र से करोड़ों पुण्यों का फल प्राप्त होता है। कथा श्रवण कर रहे श्रोता सुदामा चरित्र का वर्णन सुनकर भक्ति रस में डूब गए। अंत में मुख्य यजमान प्रेम जायसवाल ने भागवत भगवान की आरती कर कथा श्रवण कर रहे श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अरविंद उपाध्याय, शिव पूजन मिश्र, राधेकांत मिश्रा, भारत सहित तमाम श्रोताओं ने कथा का रसपान किया।
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