सिंगरामऊ क्षेत्र के मिश्रौली में चल रही श्रीमद भागवत कथा। स्रोत-संवाद
सिंगरामऊ। भक्तों के पापों हरने लेने वाला ही ईश्वर है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने का लाभ तभी है, जब हम इसे अपने जीवन में उतारें और उसी के अनुरूप व्यवहार करें। ये बातें मिश्रौली गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथावाचक संत आलोक रंजन महाराज ने कही। थावाचक ने कहा कि कथा सुनने से मानव जीवन में संस्कार का उदय होता है। भगवान से जुड़ने का उत्तम साधन है भजन। जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आ जाएं, मुनष्य को अपना धर्म व संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए। जिसकी भगवान के चरणों में प्रगाढ़ प्रीति है, वही जीवन धन्य है। ईश्वर ने विभिन्न लीलाओं के माध्यम से जो आदर्श प्रस्तुत किया, उसे हर व्यक्ति को ग्रहण करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन मूल्यों के बारे में जानकारी मिलने के साथ अपने कर्तव्य को भी समझा जा सकता है। इस मौके पर मुख्य यजमान सुषमा दुबे एवं रमेश चंद्र दुबे, योगेश दुबे, राहुल दुबे, रोहित दुबे, शिवम दुबे आदि मौजूद रहे।