खरगापुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन पंडित विजयानंद महाराज ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन को सही दिशा देने वाला ज्ञान-स्रोत है। कलियुग में भक्ति ही वह मार्ग है जो मनुष्य को पाप, अहंकार और दुखों से मुक्ति दिला सकती है। मन, वाणी और कर्म को पवित्र रखने से ही मानव जीवन सफल होता है। उन्होंने श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के हृदय में प्रेम,करुणा और क्षमा का भाव होता है, वहीं वास्तव में ईश्वर का प्रिय भक्त कहलाता है। महाराज ने परिवार में संस्कार, समाज में सामंजस्य और युवाओं में आध्यात्मिक जागरूकता की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। संवाद