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जड़ों और संस्कारों से दूर होना स्वयं, परिवार और देश के लिए घातक : शांतनु महाराज

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कथा कहते शांतनु महराज। संवाद
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जौनपुर। बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में बुधवार से शुरू हुई नौ दिवसीय श्रीरामकथा के पहले दिन कथावाचक आचार्य शांतनु महाराज ने संस्कारों और परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी जड़ों, संस्कारों और परंपराओं से दूर होना चाहते हैं, वे स्वयं, परिवार, देश और धर्म के लिए घातक हैं। श्रीरामकथा के आयोजन से एक दिन पहले मंगलवार को भव्य कलश यात्रा निकाली गई थी। गोमती नदी के किनारे स्थित हनुमान घाट से शुरू हुई यात्रा चहारसू चौराहा, ओलंदगंज, पॉलीटेक्निक चौराहा और वाजिदपुर तिराहा होते हुए बीआरपी कॉलेज मैदान पहुंची। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। जय श्रीराम के उद्घोष, बजरंगबली, राधा-कृष्ण और भगवान शिव की धार्मिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। कलश यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई। बीआरपी कॉलेज मैदान स्थित कथा स्थल पर भी फूल बरसाए गए। यात्रा में महिलाओं, युवाओं और किन्नर समाज के लोगों ने भागीदारी की। मुख्य आयोजक वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञान प्रकाश सिंह ने कहा कि बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में 29 अक्तूबर तक प्रतिदिन दोपहर तीन से शाम छह बजे तक आचार्य शांतनु महाराज श्रीरामकथा सुनाएंगे।
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