वाजिदपुर तिराहे पर सड़क पर बना गहरा गड्ढ़ा।
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जौनपुर। बदहाल सड़कों के चलते न सिर्फ वाहन तो खराब हो ही रहे हैं, लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। सड़कों पर बने गड्ढों में झटके लगने से लोग हड्डी की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। अस्पतालों में इन दिनों हड्डियों और सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
जिले से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और ग्रामीण सड़कें बदहाल हैं। ज्यादातर सड़कें गड्ढे में तब्दील हो गई हैं। उनमें से कुछ गड्ढों को भड़ने के लिए मिट्टी और गिट्टी डाल कर छोड़ दी गई है। इससे धूल भी उड़ रही है और गिट्टियों वाली सड़क पर चलने से वाहन और हड्डियों की फजीहत हो जाती है। गर्द-गुबार से लोग सांस की बीमारी की भी चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन चार से पांच मरीज सर्वाइकल और रीढ़ की बीमारी का इलाज कराने आ रहे हैं। निजी अस्पतालों में रोजाना ऐसे मरीजों की संख्या 35 से 40 के बीच है। जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ आरके जायसवाल बताते हैं कि तीन से चार महीने पहले ऐसी समस्या वाले मरीजों की संख्या प्रतिदिन दो से तीन होती थी। अब चार से पांच मरीज रोज आते हैं। ऐसी समस्या लेकर आने वाले मरीजों में अधिकतर 30 से 50 वर्ष के बीच के होते हैं।
क्या कहते हैं चिकित्सक
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ आरके जायसवाल रीढ़ की हड्डी टुकड़ों में होती है, जिसके बीच में एक द्रव होता है। गड्ढे वाली सड़कों पर बाइक चलाने से डिस्क खिस जाती है और रीढ़ दबने लगती है। इसके चलते पैरों में झुनझुनाहट होती है। कमर का निचला हिस्से में दर्द और खिंचाव होता है। कई बार स्लिप डिस्क की समस्या इतनी अधिक बढ़ जाती है कि आपरेशन करना पड़ता है। सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस के इलाज में देरी करने पर हाथ पैर सुन्न होने लगता है और चक्कर आने लगता है।