कॉलेज प्रशासन ने उसे रियायत देते हुए छात्रावास में प्रवेश दे दिया। बाद में जब छात्रावास में सत्यापन होने लगा तो कुछ कागजात को लेकर बात फंस गई। इसकी सूचना वहां के प्रभारी ने प्राचार्य को दी। प्राचार्य ने जांच कराई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। प्राचार्य प्रो. शिव कुमार ने इसकी जानकारी एसडीएम और पुलिस को दे दी है।
उन्होंने बताया कि फर्जी एनओसी, एलॉटमेंट लेटर की ऑनलाइन जब जांच करायी गई तो इसकी जानकारी हुई। पता चला कि सभी दस्तावेज फर्जी हैं। इसकी सूचना पुलिस व सदर एसडीएम को भी दे दी गई है।