रोहित के पिता को मिठाई खिलाते लोग। संवाद
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मीरगंज (जौनपुर)। जापान के नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेलों में जौनपुर के स्टार जेवलिन थ्रोअर रोहित यादव ने कांस्य पदक जीता है। उन्होंने देश और जिले का मान बढ़ाया है। सोमवार को रोमांचक फाइनल मुकाबले में रोहित ने 84.35 मीटर दूर भाला फेंककर पोडियम पर तीसरा स्थान हासिल किया। हालांकि, रोहित अपने हालिया नेशनल बेस्ट रिकॉर्ड (87.48 मीटर) को दोहराने से चूक गए। फाइनल मुकाबले में शुरुआत से कड़ा मुकाबला देखने को मिला। श्रीलंका के रोमेश पथिरागे ने 88.55 मीटर का जोरदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारत के यशवीर सिंह ने 85.72 मीटर भाला फेंककर रजत पदक पर कब्जा जमाया।
पिता जी, यह हमारा पहला मेडल है, किसी गोल्ड से कम नहीं...
जौनपुर। पिता जी..., यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारा पहला बड़ा मेडल है...। यह किसी गोल्ड से कम नहीं है। यह भावुक शब्द उस बेटे के थे जिसने एशियाई खेलों के पोडियम पर तिरंगा लहराया। दूसरी तरफ फोन पर पूर्व मैराथन धावक पिता सभाजीत यादव की आंखें खुशी से छलक उठीं। जापान के नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेल में जेवलिन थ्रो का कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने के तुरंत बाद रोहित यादव ने मछलीशहर तहसील के अदारी डभिया गांव में अपने पिता सभाजीत यादव को फोन किया। पदक गले में सजते ही रोहित ने अपनी यह कामयाबी अपने पिता के संघर्षों और देशवासियों को समर्पित किया।
पिता सभाजीत यादव ने बताया कि मुकाबला खत्म होने के कुछ ही देर बाद रोहित का फोन आया। उसकी आवाज में देश के लिए पदक जीतने का गर्व झलक रहा था। रोहित ने कहा कि भले ही रंग कांस्य का है, लेकिन एशिया के सबसे बड़े खेल मंच पर पहला पदक जीतना किसी स्वर्ण पदक से कम सुकून नहीं देता। बेटे के मुंह से यह बात सुनकर पिता अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। उन्होंने रोहित को शाबाशी देते हुए भविष्य में सोने पर निशाना साधने का आशीर्वाद दिया। ग्रामीणों ने पटाका जलाकर जश्न मनाया और मिठाइयां बांटीं।