करंजाकला/मल्हनी। उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) के सामने शुक्रवार को दोपहर सड़क दुर्घटना में घायल डीएमएलटी छात्र दीपचंद्र यादव की शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। आक्रोशित छात्रों ने मेडिकल कॉलेज के सामने लुंबिनी-दुद्धी राज्यमार्ग पर जाम लगा दिया। छात्रों ने प्रशासन और मेडिकल कॉलेज के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इससे करीब 2 घंटे तक यातायात पूरी तरह से बाधित रहा।सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के जफरपुर गांव दीपचंद्र यादव (21) शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के सामने एक वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। हादसे के बाद साथी छात्रों ने तत्काल मेडिकल कॉलेज में खड़ी एंबुलेंस की मांग की लेकिन उन्हें निराशा मिला। अंततः दोस्तों ने ऑटो की मदद से दीपचंद्र को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां इलाज के दौरान चिकित्सकों ने दीपचंद्र को मृत घोषित कर दिया।छात्रों का आरोप है कि अगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन समय रहते एंबुलेंस की सुविधा मुहैया कराता तो दीपचंद्र की जान बच सकती थी। इसी लापरवाही के चलते छात्रों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और प्राचार्य को मौके पर बुलवाने की मांग करने लगे।
जाम से ठप रही मेडिकल कॉलेज की ओपीडी
प्रदर्शन के कारण लुंबिनी-दुद्धी राज्यमार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यहां तक कि पैदल यात्री और साइकिल सवारों को भी छात्रों ने रास्ता पार नहीं करने दिया। इस वजह से मेडिकल कॉलेज की ओपीडी पूरी तरह ठप हो गई। दूर-दराज से आए मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने भी मरीजों को देखना बंद कर दिया। इससे कई गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ा। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी विनय प्रकाश सिंह, खेतासराय पुलिस और महिला पुलिस की टीम मौके पर पहुंची।
स्थिति संभालने के लिए सीओ सदर देवेश सिंह और एसडीएम पवन कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने वाराणसी से पीडब्लूडी के जूनियर इंजीनियर को बुलाकर शाम तक स्पीड ब्रेकर बनवाने का आश्वासन दिया। घटना की खबर मिलते ही समाजवादी पार्टी के मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव अमित यादव भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया और मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग की। थाना प्रभारी से उनकी नोकझोंक भी हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर छात्रों की मांगें पूरी नहीं होती हैं तो वे धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।
मांगों पर अड़े रहे छात्र : छात्रों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया गया लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। छात्रों की मांग थी कि मेडिकल कॉलेज के सामने स्पीड ब्रेकर बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही की जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। प्राचार्य को तत्काल निलंबित करने करने की मांग की।
छात्रों ने एंबुलेंस की मांग की थी ये बात संज्ञान में नहीं है। यदि घटना की जानकारी होती तो तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध कराया जाता। फिर भी पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एए जाफरी, सीएमस, मेडिकल कॉलेज जौनपुर