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लावारिस नवजात को अपनाने के बदले छोड़ना पड़ा पत्नी को, तमाम मुश्किलें झेलीं और ऐसे बन गए खास

Fri, 19 Feb 2021 02:54 PM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
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शीतला धाम कुंड में बीस साल पहले मिली बच्ची की शादी करवाते राम अजोर माली लाल कुर्ते में। संवाद - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर जिले के चौकियां धाम निवासी रामअजोर माली का न तो नाम बड़ा है और न ही पहचान, मगर उनके काम ने आज उन्हें आम से खास बना दिया है। आज के दौर में जब लोग अपने सगे रिश्तों से मुंह मोड़ रहे हैं, तब रामअजोर ने पोखरे के किनारे मिली नवजात को न सिर्फ पाल-पोस कर बड़ा किया, बल्कि धूमधाम से उसकी शादी भी की है।

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लावारिस नवजात को अपनाने के बदले उन्हें पत्नी को छोड़नी पड़ी, तमाम मुश्किलें झेलनी पड़ीं, मगर वह अपने फैसले से नहीं डिगे। गुरुवार को शादी के बाद जब बेटी की विदाई हुई तो सिर्फ रामअजोर ही नहीं, पूरा गांव उनके साथ रो पड़ा।

शीतला धाम चौकियां में स्थित पोखरे के किनारे घाट पर मार्च 2001 में एक नवजात सफेद कपड़े में लिपटी मिली। किलकारी सुनकर मंदिर के पास ही फूल-माला बेचने वाले रामअजोर की नजर पड़ी तो उसे गोद में उठा लिया। काफी खोजबीन के बाद भी बच्ची के माता-पिता का पता नहीं चला।
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ऐसे में रामअजोर ने उस बच्ची को मां शीतला का आशीर्वाद समझकर अपनाने का फैसला लिया। बड़ा फैसला था। ऐसे में उस पर हंगामा होना लाजिमी था। हुआ भी वहीं, घर में पत्नी ने इसका विरोध करते हुए दो टूक कहा कि अगर बच्ची को अपनाया तो वह घर छोड़ देगी।

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शादी - फोटो : iStock
एक और पत्नी और बच्चे थे दूसरी ओर एक नवजात। फैसला बेहद मुश्किल था। लेकिन रामअजोर ने बच्ची को नहीं छोड़ा। नाराज होकर पत्नी अपने दोनो बच्चों को लेकर मायके चली गई। पर रामअजोर अपने फैसले पर डटे रहे और अकेले ही पाल पोस कर बेटी को बड़ा किया। बुधवार को बिटिया का धूमधाम से विवाह भी किया।

बेटी पूजा ने गाजियाबाद के दीपक संग सात फेरे लिए। शादी में पूरा गांव शामिल हुआ। बढ़-चढ़कर पूजा को उपहार भी दिए। शादी के बाद विदाई के वक्त सबकी आंखों में आंसू थे। इस मौके पर रामजनक माली, बड़े भाई की भूमिका में मनोज मौर्य, आशीष माली आदि शामिल हुए।
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