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आरोप : टेंडर में 88 लाख की गड़बड़ी, डीएम ने किया निरस्त

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जौनपुर। नगर पंचायत मड़ियाहूं में ई-टेंडर प्रक्रिया में 88 लाख रुपये का घोटाला करने का आरोप लगा है। इसमें एक ही परिवार के तीन सदस्यों को लाभ देने की बात उजागर हुई है। पं.दीनदयाल उपाध्याय नगर विकास योजना के तहत यहां पर प्रकाश का टेंडर कराया गया था। इसके लिए अधिक एस्टीमेट बनाकर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा है। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डॉ.दिनेशचंद्र ने टेंडर निरस्त कर दिया है। साथ दोबारा एस्टीमेट बनाकर नई निविदा निकालने के लिए एक कमेटी बना दी है। नगर पंचायत मड़ियाहूं में पं.दीनदयाल उपाध्याय नगर विकास योजना के तहत नगर पंचायत में जौनपुर-मिर्जापुर बाईपास सड़क पर प्रकाश का टेंडर निकाला गया था। इसमें नौ मीटर जीआई पोल पर 150 वाट एलईडी लाइट के चार कार्य व 20 मीटर हाईमास्ट पोल पर 200 वाट फ्लड लाइट के पांच कार्य सहित कुल 9 कार्यों करने थे। यह कुल 2.05 करोड़ कीमत का ई-टेंडर 20 दिसंबर 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2024 निर्धारित थी। इसमें विश्वनाथ इंटरप्राइजेज जगतगंज वाराणसी की फर्म ने भी कई कार्यों के लिए टेंडर डाला। गड़बड़ी होने पर फर्म के ठेकेदार अजीत सिंह ने डीएम को पत्र देकर शिकायत की। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत मड़ियाहूं में टेंडर नियमावली व शासनादेश के खिलाफ निकाली गई है। आरोप लगाया कि दो करोड़ के एस्टीमेट में करीब 88 लाख रुपये का ओवर एस्टीमेट और बिना जरूरत की सामग्री को जोड़कर नगर पंचायत द्वारा घोटाला व भ्रष्टाचार का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही अपने चहेते ठेकेदारों के एक ही परिवार के सदस्यों की तीन फर्माें को काम देने की नीयत से 31 जनवरी को उसके फर्म की टेक्निकल बिड को बिना किसी ठोस आधार के निरस्त कर दिया गया। जिन फर्मों के पास निविदा शर्त के अनुसार पर्याप्त प्रमाण पत्र नहीं है, उनकी टेक्निकल बिड को पास कर दिया गया। उसी दिन उनका फाइनेंशियल बिड भी खोल दिया गया। इस शिकायत के बाद जिलाधिकारी डॉ.दिनेशचंद्र ने टेंडर निरस्त कर दिया। साथ ही फिर से एस्टीमेट बनाने के लिए कमेटी बनाई है। इसके बाद निविदा निकाली जाएगी। इसमें एसडीएम मड़ियाहूं कुणाल गौरव, पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार वर्मा व एक अन्य को लगाया है।
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एक ही परिवार की हैं ये तीनों फर्म :- टेंडर प्रक्रिया में लक्सरे सेल्स कार्पोरेशन लखनऊ, उत्कर्ष इलेक्ट्रीकल्स लखनऊ, तुषार इलेक्ट्रीक वर्क लखनऊ की फर्म ने हिस्सा लिया था। ये फर्म एक ही व्यक्ति पति, पत्नी व उनके बेटों की हैं। इसमें पिता एक फर्म के प्रोपराइटर, दूसरी फर्म में पिता व उसके दोनों बेटे पार्टनरशिप में हैं और तीसरी फर्म में माता व उनके दोनों बेटे की पार्टनरशिप फर्म है। यह जानने के बाद भी विभाग में पंजीयन किया गया। नगर पंचायत के पास जब इलेक्ट्रीक कार्य के अवर अभियंता मौजूद हैं तो किस आधार पर सिविल कार्य के अवर अभियंता से टेक्निकल बिड के तुलनात्मक चार्ट पर हस्ताक्षर कराया गया। विभाग द्वारा जो टेंडर निकाला गया उसमें मात्र 12 दिन का समय दिया गया जब कि एसओपी गाइड लाइन के अनुसार 40 लाख के काम के टेंडर में कम से कम 21 दिन का समय दिया जाना चाहिए।
नगर पंचायत मड़ियाहूं में टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत जिलाधिकारी स्तर पर की गई थी। जिसको निरस्त कर दिया गया। साथ ही उन्होंने कमेटी बनाई है जिसमें मेरी निगरानी में तीन सदस्य हैं जो नया स्टीमेट बनाएंगे। जिसके बाद टेंडर आमंत्रित किया जाएगा। - कुणाल गौरव, एसडीएम मड़ियाहूं।
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