बदलापुर। क्षेत्र के घनश्यामपुर बाजार में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथावाचक आचार्य धर्मराज तिवारी ने कहा कि अच्छे आचरण के बिना हर तरह का ज्ञान अधूरा है। उन्होंने कहा कि यह कथा नहीं बल्कि जीवन जीने की आचार संहिता है, जिसे सुनकर लोक व परलोक दोनों सुधारे जा सकते हैं। कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के जन्म के बाद तरह-तरह के उत्पात होने लगे। कभी पूतना जैसी राक्षसी तो कभी अघासुर जैसे राक्षस उत्पात करने लगे, किंतु सबको मोक्ष की प्राप्ति हुई। भगवान को जो जिस भाव से याद करता है वे उसे उसी रूप में मिलते हैं। वह किसी में गुण दोष का निर्धारण किए बिना सद्गति देते हैं।
गोवर्धन पूजा की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति प्रदत्त जो वस्तुएं हैं, उनका पूजन अवश्य करना चाहिए। गाय, नदी, पेड़ पौधे, यह सब साक्षात देव हैं, जो बिना कुछ लिए हमारा हित करते हैं। कथा में राजदेव तिवारी, प्रभाकर चतुर्वेदी, दूधनाथ, संतोष, अजय तिवारी, जनार्दन बरनवाल, धीरज आदि उपस्थित रहे। आयोजक प्रमोद तिवारी ने आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया।