जौनपुर। हिंदू पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर बुधवार को मनाई जाएगी। इस अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा होगी। इस दिन पूजा-पाठ, दान, स्नान और शुभकार्य करने से उनका फल अक्षय ही रहता है। बुधवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर दिन भर शुभ मुहूर्त रहेगा। लोग जम कर खरीदारी कर सकते हैं। ज्योतिष एवं रत्न विशेषज्ञ डॉ संदीप पांडेय ने बताया कि काल पुरुष की कुंडली में द्वितीय भाव का कारक गुरु होता है और दूसरे नंबर की राशि वृष पड़ती है। वृष राशि का स्वामी शुक्र है। शुक्र को धन, वैभव व भोग का अधिष्ठाता कहा गया है। मां लक्ष्मी इनकी देवी हैं। मां लक्ष्मी स्वर्ण स्वरूपा है। श्री, धन, समृद्धि के बिना जीवन संचालित नहीं हो सकता।
रोटी, कपड़ा, मकान, दवा समेत जीवन की सभी आवश्यकताएं मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से ही पूर्ण होती हैं। दुर्गा सप्तशती में मां लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए उनका पाठ किया गया है। बाकल शाखा के ऋग्वेद के पांचवें मंडल में देवी लक्ष्मी की स्तुति श्री सूक्त के मंत्रों से की गई है।अक्षय तृतीया अक्षय मुहूर्त है। इस दिन स्वर्ण आभूषण को क्रय करके घर पर लाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और जातक के धन श्री समृद्धि में वृद्धि होती है साथ ही घर में खुशहाली आती है।
29 अप्रैल की शाम 5.32 से शुरू होगी तृतीया तिथि-29 अप्रैल को शाम 5.32 बजे से तृतीया तिथि शुरू होगी और 30 अप्रैल को दोपहर 2.13 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी। इस दिन सोना, संपत्ति या वाहन की खरीदारी की जा सकती है।
शुभ मुहूर्त-पूजा का शुभ समय: प्रातः 5 बजकर 41 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। पंचांग के अनुसार, इस साल 30 अप्रैल को सुबह 5:41 मिनट से दोपहर 2:12 मिनट तक सोना खरीदने का सबसे अच्छा समय रहेगा।
अक्षय तृतीया पर इस विधि से करें पूजा
0 ब्रह्ममुहूर्त में स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
0 इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
0 अब घर के मंदिर में भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की स्थापना करें।
0 दीपक जलाकर धूप, फूल, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
0 इसके बाद विष्णु सहस्रनाम और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
0 पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद ग्रहण करें और सभी में बांटें।
0 अंत में जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करें।