विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद सपा और बसपा के प्रत्याशी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हार की समीक्षा में जुट गए हैं। विधानसभा वार हो रही समीक्षा की रिपोर्ट के साथ शीघ्र ही जिला स्तर पर होने वाली बैठक में जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों की समीक्षा की जाएगी। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों के कार्यकर्ता बूथवार मिले वोटों के आकड़ों के साथ समीक्षा में जुटे हैं। वे अपने अपने इलाकों में करारी हार के कारणों की तलाश का मंथन कर रहे।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को जिले की नौ सीटों में से सात विधानसभा सीटों पर कब्जा था। लेकिन इस चुनाव में सपा को सिर्फ तीन सीटों पर जीत मिली है। जबकि बसपा को पिछले चुनाव में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी लेकिन इस चुनाव में पार्टी को एक सीट का फायदा हुआ है। मुंगराबादशाहपुर विधानसभा सीट को बसपा ने भाजपा से छीना है। यहां से सुष्मा पटेल विधायक चुनी गई हैं। बावजूद इसके बसपा को जिले की आठ सीटों पर मिली आर पार्टी के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है।
जिलाध्यक्ष अमरजीत गौतम का कहना है कि इस चुनाव में धनबल के सहारे वोटरों को बरगलाया गया है। उनके कार्यकर्ता बूथवार पार्टी को मिले मतों की समीक्षा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि शीघ्र ही जिला स्तर पर बैठक में सभी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशियों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी को इस चुनाव में चार सीटों पर नुकशान हुआ है। पिछले चुनाव में सपा के पास सात सीटें थी लेकिन इस चुनाव में सिर्फ तीन सीट मल्हनी, शाहगंज और मछलीशहर में सपा के विधायक चुने गए हैं।
जिले के नौ विधानसभ्ाा में से केराकत, जफराबाद, मड़ियाहूं और बदलापुर में सपा को हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी के नगर अध्यक्ष डा. हसीन बब्लू कहते हैं कि जिले ही नहीं पूरे प्रदेश में पार्टी की अप्रत्याशित हार हुई है। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर हार की समीक्षा की जा रही है। ताकि आगे इससे सबक लिया जा सके।